मरम्मत के नाम पर हर साल खर्च होते हैं करोड़ों
नवहट्टा : पूर्वी कोसी तटबंध पर नदी का दबाव व कटाव प्रत्येक वर्ष होता है. बाढ़ अवधि में अभियंता तटबंध पर दिन रात चौकसी भी बरतते हैं, लेकिन बाढ़ अवधि में अभियंता को स्पर के कटाव को रोकने के लिए दिन रात मशक्कत करनी पड़ती है. 1962 में पूर्वी कोसी तटबंध निर्माण के समय एन […]
नवहट्टा : पूर्वी कोसी तटबंध पर नदी का दबाव व कटाव प्रत्येक वर्ष होता है. बाढ़ अवधि में अभियंता तटबंध पर दिन रात चौकसी भी बरतते हैं, लेकिन बाढ़ अवधि में अभियंता को स्पर के कटाव को रोकने के लिए दिन रात मशक्कत करनी पड़ती है. 1962 में पूर्वी कोसी तटबंध निर्माण के समय एन 6 स्पर की लंबाई 650 मीटर, ई टू की लंबाई 1130 मीटर 80.05 स्पर 666 मीटर लंबा था.
हर साल कोसी नदी में आयी उफान व उसके थपेड़े इन स्पर को लगातार छोटे करते रहे. अब एन 6 की लंबाई महज सौ मीटर, इ टू की लंबाई 125 मीटर व 80.05 स्पर की लंबाई 300 मीटर रह गयी है. ये सभी स्पर नवहट्टा प्रखंड से गुजरने वाली पूर्वी कोसी तटबंध के 74 से 84 किलोमीटर के बीच है.
प्रत्येक वर्ष बनता है दबाव
पूर्वी कोसी तटबंध के 74 से 84 किलोमीटर के बीच नदी व अभियंता के बीच आंख मिचौनी का खेल चलता रहता है. नदी कभी 82 किलोमीटर तो कभी 80.05 तो कभी 72.80 तो इस वर्ष 78.60 पर दबाव बनाती रहती है. फ्लड फाइटिंग के नाम पर हर साल लाखों खर्च होते हैं. लेकिन तटबंध के बाहर की जिंदगी पूरे तीन महीना भय के माहौल में जीने को विवश रहती है. कोसी नदी के दबाव को देखें, तो नदी मुख्य रूप से 82 किलोमीटर व 80.05 के बीच पिछले सात वर्ष से दबाव बनता रहा है.
वर्ष 2011-12 में नदी 82वें किलोमीटर कटाव करते करते तटबंध से महज 13 मीटर की दूरी पर रुक गयी थी, जो अब 30 मीटर के करीब है. 2012-13 में नदी ने पूर्वी कोसी तटबंध के 80.05 स्पर पर दबाव बनाया तो 2014 में 72.80 किलोमीटर पर. नदी ने 15 अगस्त 2014 को स्पर बीचो बीच तोड़कर आर-पार कर लिया था. इस वर्ष कोसी नदी ने लंबाई में कटाव शुरू कर दिया था, जिसे दो सप्ताह तक फ्लड फाइटिंग कार्य किये जाने के बाद नियंत्रण में किया जा सका.