पोड़े के धंधे से सासें अटकीं

डेहरी कार्यालय : कोयले को जला कर पोड़ा बनाने का धंधा शहर व आस-पास के इलाके में तबाही मचा रहा है. शहर से सटे पश्चिमी हिस्से में जारी उक्त धंधे से निकलने वाले जहरीले धुआं से खेती योग्य भूमि भी बंजर हो रही है. साथ ही हवा में उक्त हानिकारक धुएं के घुलने से टीबी […]

डेहरी कार्यालय : कोयले को जला कर पोड़ा बनाने का धंधा शहर व आस-पास के इलाके में तबाही मचा रहा है. शहर से सटे पश्चिमी हिस्से में जारी उक्त धंधे से निकलने वाले जहरीले धुआं से खेती योग्य भूमि भी बंजर हो रही है. साथ ही हवा में उक्त हानिकारक धुएं के घुलने से टीबी की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं.
मानव जीवन सहित पशु-पक्षियों व वृक्षों के लिए काफी खतरनाक साबित हो रहे उक्त धंधे पर अंकुश लगाने में स्थानीय प्रशासन विफल साबित हो रहा है. उक्त धंधे के प्रति प्रशासन की असफलता के पीछे भ्रष्टाचार के अंदेशा से इनकार नहीं किया जा सकता. एसपी संदीप लांडे के समय अवैध तरीके से चलने वाले धंधे के विरुद्ध चलाये गये अभियान के बाद क्षेत्र के आकाश में काला जहरीला धुआं के उठने पर रोक लग गया था, लेकिन वर्तमान समय में यह धंधा धड़ल्ले से जारी है.
कहां-कहां बनता है पोड़ा: पोड़ा के धंधेबाजों के लिए सबसे अधिक सुरक्षित क्षेत्र मनौरा का इलाका माना जाता है.वहां इस धंधे को चलाने वालों की पहुंच काफी ऊंची है. कोयला को जलाने से उठने वाले काला धुआं के आगोश में जवाहर लाल नेहरू कॉलेज, मनौरा गांव व आस पास स्थित स्कूल के छात्र-छात्राएं व ग्रामीण रहते हैं. इस बात की जानकारी लोगों द्वारा प्रशासन को भी दी जाती. प्रशासन कागजी खानापूर्ति के लिए अगल-बगल के ठिकाने पहलेजा, गरवट बिगहा, चकिया आदि पर छापेमारी भी करता है. लेकिन, मनौरा गांव के पास लगने वाले पोड़ा के धंधेबाजों पर छापेमारी नहीं होती. ऐसा लोगों का कहना है. लोग यह भी कहते हैं कि आखिर कौन सी ऐसी ताकत है जो उक्त ठिकाने पर पुलिस व प्रशासन के लोगों को पहुंचने से रोक देती है यह अधिकारी ही जानें. इस इलाके के खेतों के फसल प्रभावित हो रहे है.
इससे हर वर्ष खेत बंजर होने की समस्या बढ़ रही है. आस-पास के गांवों के साथ-साथ शहर के निवासियों पर भी हवा में मिले जहरीले धुंऐ का बूरा प्रभाव पड़ रहा है. टीवी के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है. बावजूद इसके प्रशासन की चुप्पी लोगों की समझ में नहीं आ रही है.

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