चौखट तक पहुंची सरकार पर मुआवजे की बात नहीं

पत्रकार धर्मेंद्र सिंह के परिजनों को सता रही परिवार चलाने की चिंता मंत्री से विधायक तक पहुंचे पर किसी ने मुआवजे पर नहीं की बात सासाराम नगर : पत्रकार धर्मेंद्र सिंह की हत्या के बाद उनके घर प्रदेश सरकार में मंत्री पहुंचे. शोक व्यक्त किया, दुख भी जताया. परिजनों को हर संभव मदद करने का […]

पत्रकार धर्मेंद्र सिंह के परिजनों को सता रही परिवार चलाने की चिंता

मंत्री से विधायक तक पहुंचे पर किसी ने मुआवजे पर नहीं की बात
सासाराम नगर : पत्रकार धर्मेंद्र सिंह की हत्या के बाद उनके घर प्रदेश सरकार में मंत्री पहुंचे. शोक व्यक्त किया, दुख भी जताया. परिजनों को हर संभव मदद करने का वादा कर वापस लौट गये. घटना के आठ दिन बीत गये.मगर अभी तक पीड़ित परिजनों को एक भी रुपये मुआवजा नहीं मिला.
धर्मेंद्र अपने घर का एक मात्र कमाउ सदस्य थे. तीन बच्चे, पत्नी, बूढ़े माता-पिता यही उनका परिवार है. खेती उतनी नहीं कि परिवार का खर्च चलाया जा सके. घटना के बाद बिहार सरकार के उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह, सत्ता पक्ष के विधायक वशिष्ठ सिंह, संजय सिंह यादव पत्रकार के घर मातमपूर्सी करने गये थे. बूढ़े पिता ने हाथ जोड़ कर कहा था साहब मेरे घर में कमाने वाला वहीं था. बच्चों का भविष्य खराब हो जायेगा. जो न्यायोचित हो सके दायरे में रह कर इस पीड़ित परिवार को मदद कर दें.
आप लोग तो सरकार के आदमी है. आपलोग चाहें तो यह हो सकता है. मेरी स्थिति आप देख रहे हैं जो आदमी अपने पैरों पर नहीं चल सकता अपनी परिवार को क्या मदद कर सकता है. सरकार के नुमाईंदों द्वारा जल्द मुमकिन कदम उठाने का आश्वासन मिला था. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा, सांसद सुशील सिंह,अश्विनी चौबे, अरुण सिंह, पप्पू यादव, विधान पार्षद संतोष सिंह, विधायक ललन पासवान, विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, सांसद छेदी पासवान, अचालाक अहमद जैसे दिग्गज लोगों दिवंगत पत्रकार के घर जा कर शोक प्रकट कर पीड़ित परिजनों को हर संभव मदद देने का वादा किया गया. इसमें सभापति व आैरंगाबाद सांसद ने बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी लिये. जअपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव ने पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये नकद दिया.
लेकिन सरकार के लोग अभी तक अपना वादा नहीं निभा सके है. जिस का पीड़ित परिजनों को बहुत दुख है. रविवार को पत्रकार के पिता अवधेश सिंह ने कहा नेता लोग मेरे बेटे की मौत का तमाशा बनाने आये थे मदद करने नहीं.

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