लाखों रुपये के बकाये का नोटिस देख किसान चिंतित, लोक अदालत में होना है सुलह

अकबरपुर : रोहतास पंचायत के किसान देवलाल सिंह ने वर्ष 2005-06 में दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक से केसीसी कराया था. उन्हें यह याद नहीं कि कितने का केसीसी था. लेकिन, इतना जरूर याद है कि मात्र 20 हजार रुपये निकाल कर खेती में लगाये थे. वर्ष 2008 में केंद्र की सरकार ने किसानों के लोन […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
अकबरपुर : रोहतास पंचायत के किसान देवलाल सिंह ने वर्ष 2005-06 में दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक से केसीसी कराया था. उन्हें यह याद नहीं कि कितने का केसीसी था. लेकिन, इतना जरूर याद है कि मात्र 20 हजार रुपये निकाल कर खेती में लगाये थे. वर्ष 2008 में केंद्र की सरकार ने किसानों के लोन माफी की बात कही थी.
यह बात कितनी सही थी, इसकी तो जांच किसान नहीं किये. बैंक भी तब से लेकर चंद दिनों पहले तक सुस्त रहा और अब देवलाल को 63,694 रुपये की वसूली का नोटिस थमा दिया है. इसके साथ ही आगामी नौ मार्च को डेहरी में आयोजित लोक अदालत में हाजीर होकर लोन से संबंधित सुलह को भी कहा है.
देवलाल अकेले ऐसे किसान नहीं है, इनके जैसे बड़ी संख्या में किसानों को दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक ने नोटिस थमाया है. किसान सकते में हैं. कई को लोन का याद भी नहीं है कब लिया था. तो कुछ को याद है कि कुछ रुपये का लेन-देन हुआ था. बैंक भी इतने वर्षों तक लोन वसूली में सुस्त पड़ा रहा. किसान निश्चिंत थे कि उनका लोन माफ हो चुका है. लेकिन, अब जब नोटिस आयी है, तो होश फाकता हो गया है.
केसीसी का लोन माफ नहीं हुआ
केसीसी का लोन माफ नहीं हुआ है. सरकार की ओर से लोन वसूली के लिए दबाव बनाया गया है. लगभग 90 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के लोन का नोटिस दिया गया है. माफी या कंप्रमाइज का कोई भी प्रावधान लोक अदालत में ही हो सकता है. किसानों को अगले 9 तारीख को लोक अदालत डेहरी में पहुंचने के लिए नोटिस दिया गया है.
अमरेश कुमार, प्रबंधक, दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक
कहते हैं किसान
मैंने तो खाता संख्या 73278800000506 से मात्र 20 हजार रुपये की निकासी की थी, जो बढ़ कर 63,694 रुपये हो गया है. 2005 से लेकर अब तक बैंक ने कभी कोई सूचना नहीं दी. अब प्रबंधक द्वारा नोटिस देकर दबाव बनाया जा रहा है. कानूनी कार्रवाई की बात कही जा रही है.
देवलाल सिंह
मैंने केसीसी लोन लिया था. यह याद नहीं कि कितना लोन लिया था. बैंक ने 111805 रुपये का नोटिस भेजा है. लोक अदालत में पहुंचने का फरमान दिया है. उस समय तत्कालीन मैनेजर ने कहा था कि अब पैसा को वापस नहीं करना है. फिर बैंक क्यों नोटिस दिया है. समझ में नहीं आ रहा.
मोहम्मद असलम खान
किसान क्रेडिट कार्ड से 25 हजार रुपये का लोन 2006 में लिया था. जिसका फिर बढ़ कर करीब सवा लाख रुपये हो गया है. मैं पूछता हूं कि पहले बैंक ने जमा करने के लिए कोई नोटिस जारी क्यों नहीं किया. आज करीब 10 वर्ष बाद उसे लोन का याद आ रहा है. हम कहां से रकम लाएं.
शिव हरि सिंह, पूर्व मुखिया
25 हजार रुपये का लोन था. मैं निश्चिंत था. लोन माफ हो गया है. बैंक ने भी इससे पहले कोई बात नहीं कही. अब एक बारगी नोटिस आया है और अदालत में जाने को कहा गया है. हम अदालत से इसकी शिकायत करेंगे. यह अन्याय है. हम देने में असमर्थ है. हम लोग इसका विरोध करेंगे.
सुरेश सिंह
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