बांका के इन दो गांवों में आजादी के सात दशक बाद भी नहीं बन पायी पक्की सड़क, कच्ची पगडंडी पर कट रहा जीवन

Bihar news: बिहार के विभिन्न जिलों में कई ऐसे गांव हैं, जहां आजादी के सात दशक बाद भी पक्की सड़क नहीं बन पायी है. इससे ग्रामीणों को आवाजाही में काफी परेशानी होती है. खासकर बारिश के दिनों में ग्रामीणों को कीचड़मय सड़क पर चलना दूभर हो जाता है.

निरंजन, बांका: जिले के कई ऐसे गांव हैं, जहां आजादी के सात दशक बाद भी पक्की सड़क नहीं बन पायी है. इससे ग्रामीणों को आवाजाही में काफी परेशानी होती है. खासकर बारिश के दिनों में ग्रामीणों को कीचड़मय सड़क पर चलना दूभर हो जाता है. जिला मुख्यालय के चार किलोमीटर दूर अवस्थित बेहरा पंचायत के बेहराडीह व नीमाटांड सहित अन्य गांव शामिल हैं.

जहां अभी तक पक्की सड़क नहीं बन पायी है. हालांकि इस गांव में सरकार की अन्य सुविधा बिजली व पेयजल बहाल किया गया है. वहीं गांव के कुछ हिस्सों में पक्की सड़क का निर्माण कराया गया है. जबकि गांव के आधे से अधिक हिस्सों में पक्की सड़क नहीं बन पायी है. इसे लेकर ग्रामीणों में रोष है.

कहते हैं ग्रामीण

बेहराडीह गांव के सुरेंद्र राय, लक्ष्मण राय, दीपन राय, नीमाटांड के सत्तन दास व अर्जुन दास सहित अन्य ने बताया है कि गांव में पक्की सड़क नहीं है. इससे हमलोगों को परेशानी होती है. गांव में चार पहिया वाहन नहीं पहुंच पाता है. इससे समारोह आयोजन सहित अन्य परेशानियां होती है. खासकर बारिश के दिनों में ज्यादा परेशानी होती है. वहीं बांका पहुंचने के लिए हमलोगों को 6 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी का सफर करना होता है.

कहते हैं मुखिया ऋषिकांत साह

बेहराडीह व नीमाटांड गांव में पक्की सड़क निर्माण के लिए मेरे द्वारा प्रयास किया जा रहा है. गांव के कुछ लोग निजी जमीन बताकर सड़क निर्माण में बाधा डाल रहे हैं. गांव में सड़क निर्माण हो इसके लिए पहल जारी है.

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