Success Story: कहते हैं कि जब हौसले मजबूत हों और माता-पिता का साथ मिले तो मुश्किल से मुश्किल मंजिल भी हासिल की जा सकती है. बिहार के मुंगेर जिले के तारापुर की रहने वाली रिया भारती ने इसे सच साबित कर दिखाया है. रिया ने BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में 554वीं रैंक हासिल कर रेवेन्यू ऑफिसर के पद पर चयन पाया है.
रिया की सफलता की कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और माता-पिता के भरोसे की कहानी है.
परिवार के विरोध के बावजूद पिता ने बेटी की पढ़ाई नहीं रोकी
रिया भारती की राह आसान नहीं थी. परिवार में कई लोगों ने उनकी पढ़ाई को लेकर सवाल उठाए. रूढ़िवादी सोच और पारिवारिक विवाद के कारण पिता के कुछ रिश्तेदारों ने आगे की पढ़ाई जारी रखने का विरोध किया.
लेकिन छोटी सी दुकान चलाने वाले रिया के माता-पिता ने किसी की परवाह नहीं की. उन्होंने बेटी के सपनों को सबसे ऊपर रखा और हर कदम पर उसका साथ दिया.
मुंगेर से BHU तक तय किया सफर
बचपन से ही पढ़ाई में तेज रहीं रिया भारती ने तारापुर के पैरामाउंट एकेडमी से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद सरकारी स्कूल से 12वीं पास की.
सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी और देश के प्रतिष्ठित संस्थान बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में दाखिला लिया. साल 2024 में रिया ने ग्रेजुएशन पूरा किया.
टीवी सीरियल से मिली अफसर बनने की प्रेरणा
रिया के मन में बचपन से ही कुछ बड़ा करने का सपना था. उनके पिता अक्सर उन्हें अखबार पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे और टीवी सीरियल ‘अफसर बिटिया’ देखने को कहते थे.
पिता के इसी विश्वास ने रिया के अंदर प्रशासनिक सेवा में जाने का जुनून पैदा किया. जून 2024 से उन्होंने BPSC परीक्षा की तैयारी पूरी गंभीरता के साथ शुरू कर दी.
पिता का सुबह 3 बजे वाला फोन बना ताकत
तैयारी के दौरान जब मुश्किलें बढ़ीं तो उनके पापा रिया का हौसला कभी टूटने नहीं देते थे. वह हर सुबह 3 बजे फोन कर बेटी को पढ़ाई के लिए जगाते थे. रिया दिनभर लाइब्रेरी में पढ़ाई करतीं और रात तक मेहनत में जुटी रहती थीं. वहीं, मां घर और दुकान की जिम्मेदारियां संभालते हुए बेटी को हर चिंता से दूर रखती थीं.
जब रिया ने कहा- मुझसे नहीं होगा, पिता ने दिया हौसला
BPSC मुख्य परीक्षा से पहले एक समय ऐसा आया जब दबाव और डर के कारण रिया का आत्मविश्वास डगमगाने लगा. उन्होंने पिता से कहा कि शायद वह यह परीक्षा नहीं कर पाएंगी. तब पिता ने उन्हें हिम्मत देते हुए पुराने गीत की पंक्तियां सुनाईं- 'रुक जाना नहीं तू कहीं हार के...' पिता के इन शब्दों ने रिया के अंदर नया आत्मविश्वास भर दिया और उन्होंने पूरी ताकत से परीक्षा दी.
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इंटरव्यू के दिन मां की बात ने बढ़ाया आत्मविश्वास
इंटरव्यू के दिन का एक पल रिया के लिए बेहद खास रहा. जब मां उन्हें साड़ी पहना रही थीं तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे.
मां ने कहा कि यह साड़ी किसी और की पसंद के लिए नहीं, बल्कि बेटी की अपनी पहचान और मेहनत की वजह से है. यह बात रिया के लिए सबसे बड़ा आत्मविश्वास बन गई.
उम्र कम थी, लेकिन हौसले रहे बुलंद
कम उम्र के कारण रिया कुछ पदों के लिए निर्धारित आयु सीमा पूरी नहीं कर पाईं, लेकिन BPSC 70वीं परीक्षा में 554वीं रैंक हासिल कर रेवेन्यू ऑफिसर बनकर उन्होंने अपनी काबिलियत साबित कर दी.
आज तारापुर की रिया भारती न सिर्फ अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं. उनकी कहानी साबित करती है कि मेहनत, भरोसा और परिवार का साथ हो तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है.
