नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर मनोज झा ने कहा- एक राजनीतिक अध्याय का अवसान

Rajya Sabha Election 2026: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. इसी बीच आरजेडी सांसद मनोज झा ने इस पूरे घटनाक्रम को “एक राजनीतिक अध्याय के अवसान” बताया है.

Rajya Sabha Election 2026: बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने की खबर सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है. होली के माहौल के बीच अचानक सामने आई इस खबर ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है.

एक ओर जहां जेडीयू के भीतर इसको लेकर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं विपक्षी दल भी लगातार इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. आरजेडी सांसद मनोज झा ने इसे बिहार की राजनीति के एक दौर के अंत का संकेत बताया है.

बिहार की सियासत में इस समय ‘होली के रंगों’ से ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की ‘सियासी रंगत’ की हो रही है. जहां एक ओर जेडीयू कार्यकर्ता सड़कों पर आंसू बहा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमे ने इस पूरी पटकथा के पीछे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक गहरी और सोची-समझी रणनीति होने का दावा किया है.

आरजेडी के प्रखर प्रवक्ता और सांसद मनोज झा के ताजा बयान ने आग में घी डालने का काम किया है. उन्होंने नीतीश कुमार के इस कदम को महज एक ‘व्यक्तिगत इच्छा’ नहीं, बल्कि एक युग के अंत और बिहार में किसी बड़े ‘राजनीतिक उलटफेर’ का संकेत बताया है.

‘एक राजनीतिक अध्याय के अंत की कहानी’

राज्यसभा चुनाव को लेकर जब मनोज झा से सवाल पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार राज्यसभा जा सकते हैं, तो उन्होंने इस खबर के सामने आने के तरीके पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अचानक दोपहर बाद हर मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह खबर “कुकुरमुत्ते की तरह” उगने लगी.

मनोज झा के मुताबिक अगर इस खबर के पीछे सच्चाई है और यह कोई प्लांटेड स्टोरी नहीं है, तो यह बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के खत्म होने की कहानी कहती है.

महाराष्ट्र मॉडल का जिक्र क्यों?

मनोज झा ने इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय राजनीति से भी जोड़कर देखा. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में जो राजनीतिक बदलाव हुआ, उसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने राजनीतिक तरीके में कई बदलाव किए हैं. उनका कहना था कि बिहार में भी उस मॉडल पर काम करने की कोशिश की गई है.

नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने की खबर ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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