महिला सशक्तिकरण की अद्भुत मिसाल बनी हैं महिला उद्यमी लिलि झा

महिला दिवस पर विशेष

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भारत ही नहीं विदेशों तक दिख रही है लिलि झा की उद्यमिता की धाक

मखाना के साथ कई जरुरी उपभोक्ता वस्तुओं का कर रही हैं उत्पाद

पूर्णिया. एक समय था जब देश की आधी आबादी अधिकांशतः घरों की दहलीज तक ही सीमित थीं. उनका अधिकांश समय अपने बच्चों के साथ साथ घर गृहस्थी सम्हालने और खेतीबाड़ी व पशुपालन जैसे कार्यों में ही बीतता था. हालांकि उस जमाने में भी अनेक महिलाओं ने कई उच्च स्थानों पर अपनी काबिलियत दिखायी लेकिन उनकी संख्या महज गिनती तक थीं. लेकिन बदलते समय के साथ साथ महिलाओं ने भी अपने सपनो की उड़ान भरनी शुरू की. आज लगभग हर उस क्षेत्र में महिलायें आगे बढ़ चढ़कर अपना योगदान दे रहीं हैं जहां पहले सिर्फ पुरुष वर्ग का ही वर्चस्व था. अपनी मेहनत और लगन के बल पर महिलाओं से साबित भी किया है कि वे किसी भी मामले में पुरुषों से कमतर नहीं. एक सुन्दर समाज के लिए यह आवश्यक है कि स्त्री और पुरुषों का सभी स्तर पर एक समान योगदान हो. जी हां, पूर्णिया की लिलि झा आज महिला सशक्तिकरण की अद्भुत मिसाल बन गईं हैं जिनकी उद्यमिता की धाक विदेशों तक दिख रही है.

पूर्णिया की लिलि झा एक ऐसी ही महिला उद्यमी हैं जिन्होंने अपने दम पर यह साबित किया है कि चाहे परिस्थितियां जैसी भी हो दृढ इच्छा से हर मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है. बदलते दौर में लिलि झा न केवल खुद स्वावलंबी बनीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया. पूर्णिया में उन्होंने मखाना जैसी कृषि उपज को अपने व्यवसाय का जरिया बनाया. शुरुआती दौर में कई कठिनाइयां आयीं पर उसे झेलते-सहते नई संभावनाओं की तलाश करते हुए आगे बढ़ती रहीं. पहले तो काफी छोटे स्तर पर मखाना खरीद-फरोख्त काम शुरू किया था पर अवसर मिलते ही काम को आगे बढ़ा लिया. अब वे पूर्णिया और कोशी के इलाकों से मखाना खरीदती हैं और न केवल भारत के महानगर बल्कि सिंगापुर समेत विश्व के कई देशों तक निर्यात कर रही हैं. आने वाले दिनों में वे पूर्णिया के बियाडा में बड़ा उद्योग लगाने वाली हैं. इसकी कार्ययोजना भी उन्होंने तैयार कर रखी है.

सौ परिवार की महिलाओं को 365 दिनों का काम

पूर्णिया शहर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राज मार्ग के बगल में गुलाबबाग के अब्दुल्लानगर में अवस्थित है लिलि झा का अपना कार्यालय और एक बड़ा सा वेयरहाउस वर्कशॉप जहां मखाना की गुड़ियों से लावे की तैयारी से लेकर उसकी ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग का कार्य वो खुद सम्हालती हैं. इसके अतिरिक्त पूना में भी उनका एक कार्यालय है जहां से मखाने से सम्बंधित कारोबार का संचालन किया जाता है. गुलाबबाग स्थित वेयरहाउस में इन्होने अपने साथ करीब 100 परिवार की महिलाओं के लिए 365 दिनों के कार्य को सुनिश्चित किया है. यहां कार्य करने वालों में ज्यादातर महिलाएं ही हैं. जिनके द्वारा यहां लगातार कार्य किया जाता है जबकि कार्यअवधि से अधिक समय तक कार्य के लिए अतिरिक्त राशि और घर से लाने और पहुंचाने के लिए वाहन की सुविधा भी प्रदान की जाती है.

दुनिया के 10 देशों में कर रहीं मखाना का निर्यात

लिलि झा अपने निबंधित ब्रांड के नाम से विभिन्न साइजों में तैयार मखाना पैकेट, मसालेदार छोटे पैकेट, अलग अलग स्वाद में प्रोसेस्ड व वेल्यु एडेड, डब्बाबंद मखाना तैयार कर उसे देश के विभिन्न इलाकों से लेकर विदेश तक भेजती हैं. बातचीत के क्रम में उन्होंने बताया कि उनके उत्पाद सिंगापुर, यूके, यूएसए, दुबई, गल्फ तथा यूरोपियन कंट्रीज सहित करीब 10 देशों तक भेजे जाते हैं.

महज मखाना तक उद्योग सीमित नहीं

लिलि झा का उद्योग मखाना तक सीमित नहीं है. वे सामान्य तौर पर घरों में उपयोग होने वाली कई उपभोक्ता सामग्रियों का भी उत्पादन कर रही हैं. मूंगफली तेल, सरसों तेल, नारियल तेल, शहद, घी आदि की भी पैकेजिंग कर ऑन लाइन मार्केटिंग के जरिये घरों तक उपलब्ध कराती हैं. आज उनका अपना वेवसाइट है जिसके जरिये ऑनलाइन कारोबार का संचालन वे कर रही हैं. इसके अतिरिक्त नामी-गिरामी रिटेल आउटलेट्स एवं मॉल के जरिये भी उनके उत्पाद लोगों तक पहुंच रहे हैं.

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