पूर्णिया : पूर्णिया शहर से करीब सात किलोमीटर दूर पूर्णिया सिटी स्थित बाबा भैरवनाथ मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित बाबा भैरवनाथ की दुर्लभ आपरूपी प्रतिमा है, जिसे बिहार में अपनी तरह की एकमात्र प्रतिमा माना जाता है.
700 वर्ष पुराना है मंदिर
पूर्णिया सिटी काली मंदिर से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर करीब 700 वर्ष पुराना बताया जाता है. मंदिर परिसर में भगवान भैरवनाथ के साथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ भी विराजमान हैं. उत्तर बिहार का यह एकमात्र श्री जैन श्वेतांबर पार्श्वनाथ मंदिर है, जहां बाबा भैरवनाथ की प्रतिमा भी स्थापित है.
मंदिर के पुजारी दुर्गेश झा बताते हैं कि बिहार में बाबा भैरवनाथ की ऐसी आपरूपी प्रतिमा कहीं और नहीं है. प्रतिमा को तेल और सिंदूर से विशेष रूप से अलंकृत किया जाता है.
मुंह ढंककर पूजा करने की अनूठी परंपरा
इस मंदिर की एक और विशेष परंपरा है कि यहां पूजा-अर्चना के दौरान पुजारी और श्रद्धालु मुंह को कपड़े या मास्क से ढंकते हैं. जैन परंपरा के अनुसार ऐसा वातावरण की शुद्धता बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विकार को बाहर निकलने से रोकने के उद्देश्य से किया जाता है. मंदिर में आज भी इस परंपरा का पालन किया जाता है.
सालाना उत्सव में जुटते हैं हजारों श्रद्धालु
श्री जैन श्वेतांबर पार्श्वनाथ मंदिर में हर वर्ष भव्य वार्षिक उत्सव का आयोजन होता है. इस दौरान बाबा भैरवनाथ की विशेष पूजा-अर्चना, छप्पन भोग, महाआरती, हवन और ध्वजारोहण जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं. इस अवसर पर पूर्णिया प्रमंडल के अलावा नेपाल और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
मंदिर में बाबा भैरवनाथ के साथ माता पद्मावती (लक्ष्मी माता) की भी विशेष पूजा की जाती है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां श्रद्धापूर्वक पूजा करने से सुख-समृद्धि और मनोकामना की प्राप्ति होती है.
