किलकारी के आंगन में होगा आज नृत्य की विविध लोक संस्कृति का संगम

दो दिवसीय राज्य स्तरीय लोक नाच उत्सव

पूर्णिया में आज से शुरू हो रहा दो दिवसीय राज्य स्तरीय लोक नाच उत्सव

बिहार के नौ प्रमंडलों के बाल कलाकारों संग शिक्षकों की लग रही जमघट

पूर्णिया को इस बार मिला है मेजबानी का मौका, तैयारी को दिया फाइनल टच

पूर्णिया. विश्व रंगमंच दिवस पर गुरुवार 27 मार्च को किलकारी के आंगन में बिहार के विविध लोक नृत्य कला और संस्कृति का संगम होगा. बिहार के विभिन्न जिलों से आए किलकारी बाल भवन के बाल कलाकार पूर्णियावासियों को प्रदेश की विभिन्न भाषा और बोली और अपनी-अपनी लोक नृत्य संस्कृति से रु ब रु कराएंगे. इसमें अंगिका, मैथिली, भोजपुरी बज्जिका और मगही जैसी भाषाएं शामिल हैं राज्य स्तरीय लोक नाच उत्सव, 2025 में इस बार पूर्णिया को मेजबानी का मौका मिला है. गुरुवार की सुबह से ही पूर्णिया के किलकारी बाल भवन में बाल कलाकारों और शिक्षकों का जमघट लग जाएगा. पूर्णिया के किलकारी की ओर से उत्सव की तैयारियों को बुधवार की शाम फाइनल टच दिया गया.

गौरतलब है कि आगामी 27 मार्च एवं 28 मार्च को होने वाले इस लोक नाच उत्सव में कुल 9 प्रमंडलों में संचालित किलकारी बिहार बाल भवन के लोक नृत्य दल के कलाकार अपनी सहभागिता दर्ज करेंगे. इसमें अन्य कई विद्यालय के प्रतिभागी दल भी शामिल होंगे. पूर्णिया प्रमंडल के अलावा यहां आने वालों में पटना, सारण, मुंगेर, भागलपुर, दरभंगा, गया, मुजफ्फरपुर व सहरसा प्रमंडल के कलाकार शामिल हैं. मुख्य अतिथि के रूप में प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में जिलाधिकारी कुंदन कुमार इस उत्सव में शिरकत करेंगे. मेजबान संगीत दल के स्वागत के साथ उत्सव का आगाज होगा और फिर शुरू होगा प्रस्तुतियों का सिलसिला जिसमें बाल कलाकार धमाल मचाएंगे. किलकारी बाल भवन पूर्णिया के प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक त्रिदीप शील अपनी पूरी टीम के साथ इसमें जुटे हुए हैं.

आकर्षण का केंद्र बिन्दु बनेगी रंगयात्रा

राज्य स्तरीय लोक नाच उत्सव शुरू होने के पहले विशेष रूप से रंगयात्रा निकाली जाएगी जो आकर्षण का केन्द्र विन्दु बनेगी. इस रंगयात्रा में 300 से अधिक मंचीय के कलाकार अपनी सहभागिता दर्ज करेंगे . इस दौरान सभी किलकारी बिहार,भागलपुर, पूर्णिया के प्रांगण से निकलकर पूर्णिया नगर के विभिन्न चौराहा से होकर नगर का भ्रमण करते हुए पुनः किलकारी परिसर पहुंचेंगे जहां रंगयात्रा का समापन किया जाएगा. इससे पहले रंगयात्रा करते हुए सभी कलाकार नगर में भ्रमण के दौरान लोगों के बीच सांस्कृतिक संदेश भी देंगे. विश्व रंगमंच दिवस पर यह संदेश देंगे कि जीवन हमेशा रंग बिरंगा रहे, इसके लिए आपको संस्कृति से जोड़े रहना बहेद जरूरी है.

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