पर्यावरण को ले पूर्णिया में सौरा नदी को ले फिर मुहिम की सुगबुगाहट

अस्तित्व के संकट से बचाने की कवायद

जीवनदायिनी सौरा नदी को अस्तित्व के संकट से बचाने की कवायद

लगातार घट रही नदी की गहराई व धारा में बाधा को ले लोग चिंतित

पूर्णिया. सौरा नदी को बचाने के मुद्दे बने कई साल हो गये पर न तो अभी उम्मीदें खत्म हुई हैं और न हो जोश व जज्बे में कमी आयी है. शहरवासी यह मान रहे हैं कि पर्यावरण को शुद्ध रखना है सौ शहर के बीच से गुजरी सौरा नदी को बचाना ही होगा. यही वजह है कि एक बार फिर पूर्णिया में सौरा बचाओ का नारा लगने लगा है. अहम यह है कि पिछले कई सालों से स्वच्छता और पर्यावरण के लिए काम कर रहा ‘ग्रीन पूर्णिया’ ने इसके लिए सुगबुगाहट शुरू कर दी है. ग्रीन पूर्णिया से जुड़े शहर के प्रबुद्ध नागरिक मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण जीवन के लिए जरुरी हो गया है और इस लिहाज से भी आने वाले दिनों में जीवन देने वाली सौरा नदी को हर हाल में अस्तित्व के संकट से निकालना होगा. दरअसल, सौरा नदी का पानी गुजरते वक्त के साथ घटता जा रहा है जबकि आकार में भी सिकुड़न आ रही है. पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे ग्रीन पूर्णिया ने इसे गंभीरता से लिया क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण जहां बारिश का दर कम हो रहा है वहीं मौसम का तापमान भी लगातार चढ़ता जा रहा है. जिला मुख्यालय में सौरा अकेली नदी बच गयी है जिसमें बहाव है पर जगह-जगह रुकावट भी है. पिछले वर्ष ग्रीन पूर्णिया के संस्थापक अध्यक्ष ने पूरी टीम के साथ इसका सर्वे किया था और पूर्व से सौरा बचाओ अभियान से जुड़े पर्यावरण प्रहरियों से भी सम्पर्क साधा था. इस लिहाज से सौरा को उसके वास्तविक स्वरुप में लाने के लिए बड़ी कार्ययोजना महसूस की जा रही है जिसमें राज्य और केन्द्र सरकार की भागीदारी अनिवार्य हो जाती है. इसके लिए पत्राचार किया जा रहा है जबकि नदियों को लेकर देश और दुनिया में काम करने वाले संस्थानों से भी राय-शुमारी की जा रही है.

सौरा नदी का घटता पानी बढ़ता संकट

सौरा नदी का घटता पानी आने वाले सालों के लिए जल संकट का संकेत दे रहा है. जानकारों की मानें तो यहां भूगर्भीय जल स्तर सालाना छह इंच नीचे जा रहा है और यह सिलसिला पिछले एक दशक से चल रहा है. हालांकि यह नदी अब तक कभी सूखी नहीं है पर अब हालात गंभीर होने लगे हैं. मौसम और भूगर्भ के जानकार बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन और मौसम के गरमाते मिजाज के कारण ग्राउंड वाटर लेवल नीचे जा रहा है जो चिन्ता का विषय है. शहरी क्षेत्र के भूजल स्तर में गिरावट की कोई बात अभी सामने नहीं आयी है पर नदी का पानी जिस तरह कम हो रहा है उससे आने वाले सालों में जल संकट का संकेत बताया जा रहा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वर्ष 2006 के बाद से लगातार बारिश कम हो रही है. जानकारों ने बताया कि बदलते दौर में मौसम का मिजाज समय से पहले गर्म हो जाता है जबकि ऐसी स्थिति अमूमन जून महीने में हुआ करती थी. ग्रीन पूर्णिया के सचिव रविन्द्र कुमार बताते हैं कि इस लिहाज से भी नदी को बचाना जरुरी है और ग्रीन पूर्णिया द्वारा इसके लिए बहुत जल्द सार्थक पहल की जाएगी.

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आंकड़ों का आइना

1987 में पहली बार सौरा नदी के कायाकल्प की हुई थी पहल 2019 के अंत में सौरा नदी को प्रशासन ने संज्ञान में लिया 2017 में सौरा नदी के सर्वे के लिए गठित हुई थी अधिकारियों की टीम 2.18 किमी. तटबंध का सौन्दर्यीकरण पहले चरण में होना था 3.62 किलोमीटर सौरा के दाएं श्रीनगर तटबंध पर बननी थी सड़क 4.30 किलोमीटर पामर तटबंध पर किया गया था जीएसबी 1.98 किलोमीटर कप्तान पुल के उपर तट को सजाने की थी योजना 2.16 किलोमीटर लंबाई तक कप्तानपुल के नीचे किया गया था जीएसबी

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