बदल गया पूर्णिया में मौसम का मिजाज, गुम हुई दिन की धूप , रात में पारा डाउन

गुम हुई दिन की धूप , रात में पारा डाउन

पूर्णिया. आखिरकार नवंबर केआखिरी सप्ताह शुरूहोते-होते पूर्णिया में मौसम का मिजाज बदल गया. दिन में रहने वाली गुनगुनी धूप भी गायब हो गई. उत्तर-पश्चिमी पछुआ हवाओं का जोर बढ़ गया जबकि तापमान में गिरावट आने से रात के समय ठंड का अहसास भी होने लगा है. मौसम विशेषज्ञों की मानें तो ठंडी हवाओं के कारण अभी रात के तापमान में दो डिग्री तक गिरावट आ सकती है जिससे ठंड का असर बढ़ जाएगा. आईएमडी के अनुसार इस दौरान जिले में देर रात से सुबह तक कोहरे की सफेद चादर दिखेगी. इस बीच पूर्णिया में मौसम का अधिकतम तापमान 29.8 एवं न्यूनतम तापमान 16.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया. इससे पहले शनिवार को अधिकतम 30.4 एवं न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. गौरतलब है कि मौसम में इस बदलाव का संकेत शनिवार से दिखने लगा था. पूर्वानुमान में बताया गया था कि दिन में गुनगुनी धूप रहेगी और शाम के समय ठंड सताएगी. मगर,रविवार की सुबह धूप के साथ जरुर हुई पर दोपहर होते-होते धूप गुम हो गई और दोपहर बाद से ही हल्की ठंड का अहसास होने लगा. इधर, पूर्णिया के मौसम पूर्वानुमान इंडेक्स कीमानें तो आने वाले 27 नवंबर तक तापमान में लगातार एक से दो डिग्री तक गिरावट आ सकती है जबकि देर रात से सुबह के बीच लगातार कोहरा का असर रह सकता है. इंडेक्स में अगले एक सप्ताह तक के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है पर मौसम विभाग की ओर से सुबह की यात्राओं में सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा गया है कि दिन में बहुत असर नहीं होगा पर रात के समय पारा तेज़ी से नीचे आएगा. इस दौरान देर रात से सुबह तक हल्का से मध्यम कोहरा छा सकता है और धुंध से सड़क सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.

स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की जरूरत

इस बीच मौसम में हो रहे बदलाव को देखते हुए डाक्टरों ने भी आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. पूर्णिया के फिजिशियन डाॅ केके चौधरी ने कहा है कि सुबह और शाम के तापमान में काफी अंतर आने लगा है. इस स्थिति में सर्दी-खांसी, वायरल बुखार और अस्थामा के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है. डा. चौधरी ने बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रुप से बचाव की सलाह दी है और कहा है कि शाम को ठंड और दिन में गुनगुनी धूप से वायरस और बैक्टीरिया जनित रोग बढ़ सकते हैं. अगर इस मौसम में जुकाम हो जाता है तो नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बच्चे निमोनिया के शिकार हो सकते हैं और दमा पीड़ितों की तकलीफें बढ़ सकती है. छोटे बच्चों पर खास ध्यान देना जरूरी है. साथ ही जुकाम होने की स्थिति में बेहतर इलाज कराना चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >