दही-चूड़ा भोज के बहाने तिलकुट की मिठास से खत्म की जाएगी सियासी रिश्तों की खटास

प्रमुख लोगों को जोड़ने की होगी कवायद

मकर संक्रांति के भोज के साथ मिटाई जाएगी विस चुनाव से बनी आपस की दूरियां

पांच दिनों के भोज दौर में पार्टी वर्करों के साथ प्रमुख लोगों को जोड़ने की होगी कवायद

पूर्णिया. मकर संक्रांति भले ही हिन्दू समाज का पारंपरिक पर्व है पर राजनीतिक महकमे में नेताओं का दही-चूड़ा भोज खास मायने रखता है. अगर चुनाव करीब है तो इसके बहाने पार्टी वर्करो के साथ प्रमुख लोगों को जोड़ने की कवायद होती है और अगर चुनाव खत्म हो गया है तो इस भोज के बहाने गिले-शिकवे दूर कर आपसी रिश्तों में मिठास लाने का जतन किया जाता है. यही वह अवसर है जब दही-चूड़ा के सामुहिक भोज के बहाने नेता अपने नये समीकरण, गठबंधन की मजबूती या फिर कोई नया सियासी पैगाम जनता तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं. फिलहाल अभी हाल के महीनों में ही दो-दो चुनाव सम्पन्न हुए हैं और इस दौरान राजनीतिक उठापटक के दौरान आपस की दूरियां भी बढ़ी हैं. इस लिहाज से यह माना जा रहा है कि रविवार से शुरू हुए दही-चूड़ा के भोज के साथ न केवल ‘सियासी खिचड़ी’ पकेगी बल्कि पिछले दोनों चुनाव के बाद दही-चूड़ा के साथ तिलकुट की मिठास से सियासी रिश्तों की खटास खत्म की जाएगी.

गौरतलब है कि मकर संक्रांति का पर्व इस साल 14 जनवरी को है पर दही-चूड़ा का राजनीतिक भोज 11 जनवरी रविवार से ही शुरू हो गया है. इस साल कुछ ही महीना पहले विधानसभा चुनाव हुआ है. वैसे, मकर संक्रांति का यह भोज भले ही सामाजिक पहलुओं से हो रहा हो पर यह तय माना जा रहा है कि होने वाले इस भोज के दौरान चुनावी कारणों से बिगड़े राजनीतिक एवं सामाजिक रिश्तों को मजबूती देने पर पूरा फोकस रहेगा. अलग-अलग आयोजित होने वाले मकर संक्रांति के भोज के आयोजन को ‘समरसता भोज, मिलन समारोह’जैसे नाम दिए गये हैं. समझा जाता है कि भोज के दौरान न केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं को ‘बुस्टअप’ किया जाएगा बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माने जाने वाले शहर के गणमान्य लोगों को जोड़ने की कवायद भी की जाएगी. पिछले कुछ सालों से पूर्णिया की यह सियासी परम्परा सुर्खियों में रही है. मकर संक्रांति पर 11 से 15 जनवरी के बीच पांच दिनों में सात-आठ राजनीतिक दरबारों में दही-चूड़ा के भोज का आयोजन हो रहा है. कोशिश यह की जा रही है कि हर भोज में पूरा जिला नहीं तो कम से कम हर विधानसभा क्षेत्र के लोग पहुंचें.

पप्पू यादव 13 जनवरी को करेंगे दही-चूड़ा भोज

दही-चूड़ा भोज की शुरुआत पूर्णिया के भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक डाॅ संजीव कुमार ने 11 जनवरी को कर दी है. पूर्णिया की डिप्टी मेयर पल्लवी गुप्ता बुधवार 14 जनवरी भोज का आयोजन कर रही हैं. भोज में दही-चूड़ा और तिलकुट के साथ पारंपरिक खिचड़ी को भी शामिल किया गया है. इससे पहले 13 जनवरी मंगलवार को पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की ओर से दलित-आदिवासी समाज के बीच झीलटोला मैदान में इस भोज का आयोजन किया जा रहा है. सांस्कृतिक कार्यक्रम सांसद श्री यादव के भोज का आकर्षण होगा. इस भोज में पूरे संसदीय क्षेत्र के लोग जुटने वाले हैं. सांसद श्री यादव के इस आयोजन में बेहिसाब भीड़ जुटती है.

मंत्री लेशी सिंह के घर 14 को होगा भोज

मकर संक्रांति के असली दिन यानी 14 जनवरी बुधवार को बिहार सरकार की खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह की ओर से लायन सेवा सदन परिसर में भोज का आयोजन किया है. यहां भी हर साल की तरह न केवल धमदाहा विधानसभा क्षेत्र बल्कि पूर्णिया और आस पास के नागरिक, नेता और कार्यकर्ता जुटेंगे. इसी दिन पूर्णिया के भाजपा विधायक विजय खेमका की ओर से कला भवन परिसर में चूड़ा-दही का भोज आयोजित हो रहा है. इसी दिन पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा की ओर से रामबाग स्थित निज निवास पर दही-चूड़ा का भोज आयोजित होगा.

15 जनवरी को महापौर के घर आखिरी भोज

पांचवें और अंतिम दिन 15 जनवरी को पूर्णिया की महापौर विभा कुमारी की ओर से निज निवास पर और भाजपा नेता पंकज कुमार पटेल एवं भाजपा की जिला मंत्री नूतन गुप्ता मधुबनी शांतिनगर में इस भोज का आयोजन कर रहे हैं. राजनीतिक प्रेक्षकों की नजरों में मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा भोज महज रस्म अदायगी नहीं होती, बल्कि इसी भोज में सियासत के दांव तय होते हैं. प्रेक्षकों की मानें तो सियासी महकमे के इस भोज से अलग-अलग मैसेज जाते हैं जिसमें कुछ सामने दिखता है तो कुछ इशारों ही इशारों में तय होता है.

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Author: ARUN KUMAR

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