स्वच्छ तालाब में स्नान और सूर्यदेव की आराधना, पूर्णिया के इस मंदिर में उमड़ती है भारी भीड़

Sun Temple Sunday Puja: रविवार का दिन और सूर्य उपासना का अनूठा संगम. पूर्णिया के एक ऐसे पवित्र धाम की कहानी जो अस्सी के दशक से लेकर आज तक लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का गवाह बना हुआ है, जहां कदम रखते ही मन शांत हो जाता है.

Sun Temple Sunday Puja: पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट: पूर्णिया के सुदीन चौक से पूर्वी हिस्से में स्थित छठ पोखर पर स्थापित सार्वजनिक सूर्य नारायण मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का एक बड़ा केंद्र है. रविवार के विशेष दिन पर यहां दूर-दराज से आने वाले भक्त पवित्र और स्वच्छ तालाब में स्नान कर न केवल भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करते हैं, बल्कि विशेष पूजन अनुष्ठान भी करते हैं.

संगमरमर की भव्य प्रतिमा और अस्सी के दशक का इतिहास

मंदिर के गर्भगृह में स्थापित संगमरमर की सूर्यदेव की अलौकिक प्रतिमा यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है. स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, इस स्थल पर भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना का इतिहास अस्सी के दशक से जुड़ा हुआ है. शुरुआत में यहां कोई स्थायी ढांचा या प्रतिमा नहीं थी, बल्कि छठ महापर्व के पावन अवसर पर हर साल भव्य पंडाल बनाकर मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाती थी. बाद के दिनों में स्थानीय भक्तों और समाज के सहयोग से यहां एक भव्य मंदिर निर्माण की नींव रखी गई.

कलश यात्रा के बाद साल 2022 में हुई प्राण प्रतिष्ठा

लगातार चले निर्माण कार्य के बाद वर्ष 2015 में सूर्य देव मंदिर का ढांचा पूरी तरह बनकर तैयार हुआ. इसके बाद, वर्ष 2022 में पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई. इसी दौरान मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की रस्म पूरी करते हुए सूर्य देव की इस खूबसूरत संगमरमर की प्रतिमा को स्थापित किया गया. तब से लेकर आज तक इस मंदिर की ख्याति और मान्यता लगातार बढ़ती जा रही है.

रोजाना होती है आरती, महापर्व छठ में सजता है अनूठा दरबार

स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने बताया कि स्थापना के बाद से ही यहां रोज सुबह और शाम को विशेष मंत्रोच्चार के साथ सूर्यदेव की भव्य पूजा और आरती का आयोजन किया जाता है. इस दैनिक आरती में न केवल आस-पास के लोग बल्कि पूर्णिया शहर के कोने-कोने से आकर श्रद्धालु अपनी भागीदारी निभाते हैं. महापर्व छठ के अवसर पर तो इस पूरे परिसर की महत्ता और भी ज्यादा बढ़ जाती है, जब हजारों व्रती भगवान सूर्य को अर्घ्य देने और अपनी मन्नतें पूरी होने पर अनुष्ठान करने के लिए इस ऐतिहासिक तालाब और मंदिर परिसर में जुटते हैं.

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Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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