पूर्णिया: सिमलबाड़ी घाट पर नाव ही एकमात्र सहारा, कनकई नदी पर पुल न होने से 8 पंचायतों की आबादी परेशान

पूर्णिया के बैसा प्रखंड में कनकई नदी पर पुल न होने से सिमलबाड़ी घाट के पास हज़ारों लोगों की ज़िन्दगी नाव के भरोसे है. 7-8 पंचायतों के लोग रोज़ाना नदी पार करने के लिए नाव पर निर्भर हैं, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बाज़ार जैसी ज़रूरी सुविधाओं तक पहुँच मुश्किल हो जाती है.

पूर्णिया के बैसा प्रखंड में कनकई नदी की धारा पर पुल नहीं होने से हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी नाव के भरोसे चल रही है. सिमलबाड़ी घाट के पास कनकई नदी की धारा को पार करने के लिए स्थानीय लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है. सामान्य दिनों में नाव से किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं. कई बार आवागमन बाधित होने से लोगों को प्रखंड मुख्यालय और दूसरी जरूरी जगहों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है.

7-8 पंचायतों के लोगों का रोज का सफर नदी पर निर्भर

स्थानीय लोगों के अनुसार सिमलबाड़ी घाट से होकर बैसा प्रखंड की कई पंचायतों और गांवों के लोगों का आवागमन होता है. मंझोक, मुंगराप्याजी, बलुआ गोस्तरा, धूसमल, सिरसी, कंफलिया, खपड़ा सहित आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए यह रास्ता महत्वपूर्ण है. इन इलाकों के हजारों लोग अपने दैनिक जरूरतों के लिए रौटा बाजार पर निर्भर हैं. स्थानीय स्तर पर बताया गया कि इन गांवों के लोगों की खरीदारी, रोजगार से जुड़ी गतिविधियां और अन्य जरूरी काम काफी हद तक रौटा बाजार से जुड़े हैं. ऐसे में नदी पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण लोगों को आवागमन की समस्या का सामना करना पड़ता है.

पूरब पार की बड़ी आबादी को शिक्षा और इलाज के लिए भी करना पड़ता है सफर

कनकई नदी के पूरब पार बड़ी आबादी निवास करती है. स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र के लोगों की चिकित्सा, शिक्षा और बाजार संबंधी जरूरतों के लिए प्रखंड मुख्यालय स्थित रौटा बाजार प्रमुख केंद्र है. पुल नहीं होने की वजह से इन जरूरी सेवाओं तक पहुंचना लोगों के लिए आसान नहीं है. खासकर बारिश के दिनों में जब नदी की धारा तेज हो जाती है, तब नाव से आवागमन भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. ऐसे समय में लोगों को दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे यात्रा की दूरी और समय दोनों बढ़ जाते हैं.

बरसात में बढ़ जाती है परेशानी, कोसों दूर घूमकर पहुंचते हैं लोग

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में कनकई नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण सिमलबाड़ी घाट से आवागमन प्रभावित हो जाता है. नदी की धारा तेज होने पर नाव से यात्रा करना भी लोगों के लिए चिंता का कारण बनता है. रास्ता बाधित होने की स्थिति में ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाकर प्रखंड मुख्यालय या अन्य स्थानों तक पहुंचना पड़ता है.

इसका असर सबसे अधिक मरीजों, विद्यार्थियों, छोटे कारोबारियों और रोजाना बाजार आने-जाने वाले लोगों पर पड़ता है. जरूरी काम के लिए अतिरिक्त दूरी तय करने से समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं.

ग्रामीण बोले, नाव ही सहारा, स्थायी समाधान की जरूरत

स्थानीय लोगों ने कहा कि वर्षों से नदी पार करने के लिए नाव ही एकमात्र प्रमुख सहारा बनी हुई है. ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र की आबादी बढ़ने और रोजमर्रा की जरूरतें बढ़ने के बावजूद नदी पर स्थायी पुल का निर्माण नहीं हुआ है. इससे लोगों को आवागमन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी होती है. मुखिया प्रतिनिधि अबु अमामा ने बताया कि इलाके की कई पंचायतों की पूरी दिनचर्या रौटा बाजार से जुड़ी हुई है. लोगों को रोजाना नदी पार कर बाजार और प्रखंड मुख्यालय की ओर जाना पड़ता है. पुल बन जाने से क्षेत्र के लोगों को काफी सुविधा मिल सकती है.

पुल बनने से बदल सकती है हजारों लोगों की रोजमर्रा की तस्वीर

स्थानीय लोगों का कहना है कि कनकई नदी की इस धारा पर पुल का निर्माण होने से बैसा प्रखंड के कई गांवों और पंचायतों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा. इससे रौटा बाजार तक पहुंच आसान होगी और प्रखंड मुख्यालय से संपर्क भी बेहतर हो सकेगा. ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान इस समस्या की ओर आकृष्ट करते हुए सिमलबाड़ी घाट पर कनकई नदी की धारा के ऊपर स्थायी पुल निर्माण की मांग की है. लोगों का कहना है कि पुल बनने से बरसात में होने वाली परेशानी काफी हद तक दूर हो सकती है और क्षेत्र के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार तथा अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने में आसानी होगी.

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By Prabhat khabar news desk

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