Siddhivinayak Mandir: पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट: सनातन धर्म में भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य देव माना गया है. यही कारण है कि किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले सबसे पहले गणपति बप्पा की आराधना की जाती है. श्रीगणेश को विघ्नहर्ता, संकटमोचन और बुद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है. वैसे तो भगवान गणेश हर सनातनी के घर में विराजते हैं, लेकिन पूर्णिया जिले के कसबा प्रखंड स्थित ‘श्री सिद्धिविनायक मंदिर’ की महिमा निराली है. यहाँ प्रतिदिन, विशेषकर प्रत्येक बुधवार को, दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ विशेष पूजन-अनुष्ठान के लिए पहुंचते हैं.
मुरारी टोल में स्थित है मंदिर; लक्ष्मी और सरस्वती दोनों का है वरदान
यह भव्य मंदिर पूर्णिया-अररिया मुख्य मार्ग के समीप कसबा के मुरारी टोल में अवस्थित है. स्थानीय लोग बताते हैं कि कसबा इलाके की एक अनूठी खासियत है— यहाँ माता लक्ष्मी और मां सरस्वती दोनों का समान रूप से वरदान प्राप्त है. यही वजह है कि यह क्षेत्र न केवल व्यापार और धन-संपदा के मामले में समृद्ध है, बल्कि शिक्षा और बौद्धिक क्षमता के क्षेत्र में भी यहाँ के लोग बहुत आगे हैं. इसी पावन भूमि पर बना यह सिद्धिविनायक मंदिर पूरे इलाके को सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर रखता है. यहाँ नियमित पूजा-अर्चना के अलावा गणेश चतुर्थी और अन्य विशेष उत्सवों पर मेले जैसा नजारा देखने को मिलता है.
प्रसिद्ध सर्जन डॉ. अनिल गुप्ता ने की थी स्थापना, भव्य प्रतिमा देख मंत्रमुग्ध होते हैं भक्त
मुरारी टोल स्थित इस मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठापित भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा अपनी अद्भुत कलाकृति, अलौकिक आध्यात्मिकता और दिव्यता से भक्तों को पहली ही नजर में मंत्रमुग्ध कर देती है. मंदिर परिसर में कदम रखते ही एक असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
मंदिर का इतिहास:
इस मंदिर की स्थापना पूर्णिया के सुप्रसिद्ध शल्य चिकित्सक (Surgeon) डॉ. अनिल कुमार गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी पिंकी गुप्ता के द्वारा करवाई गई थी. उनके द्वारा प्राण-प्रतिष्ठित कराई गई भगवान गणेश की यह श्वेत व भव्य प्रतिमा क्षेत्र में बेहद शुभ और शांतिदायक मानी जाती है.
बुधवार को विशेष महाआरती, सुख-समृद्धि की मांगते हैं मन्नतें
श्री सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर जिलावासियों में यह दृढ़ विश्वास है कि यहाँ सच्चे दिल से मत्था टेकने वाले हर भक्त की झोली बप्पा खुशियों से भर देते हैं. वैसे तो यहाँ प्रतिदिन सुबह और शाम वैदिक रीति-रिवाज से पूजा और आरती संपन्न की जाती है, लेकिन बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होने के कारण इस दिन श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है.
बुधवार की सुबह से ही मंदिर परिसर शंखध्वनि, घंटियों की गूंज और पवित्र मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहता है. महाआरती और अनुष्ठान संपन्न होने के बाद श्रद्धालु बप्पा के चरणों में शीश नवाकर अपने परिवार की सुख, शांति, बेहतर स्वास्थ्य और समृद्धि की मन्नतें मांगते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं.
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