पूर्णिया, अमौर. प्रखंड क्षेत्र की धुरपैली पंचायत के मधवाकोल गांव में सर्पदंश से प्रभावित 8 वर्षीय बच्ची शनम फातमा की समय पर इलाज मिलने से जान बच गई. बच्ची को गंभीर हालत में रेफरल अस्पताल अमौर लाया गया था, जहां चिकित्सकों की टीम ने तत्काल इलाज शुरू किया. इलाज के बाद बच्ची की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है और वह फिलहाल खतरे से बाहर है.
गली में खेल रही थी बच्ची, पीछे से सांप ने डंसा
बच्ची के चाचा मीर जफर ने बताया कि शुक्रवार को दोपहर करीब दो बजे शनम फातमा अपनी गली में खेल रही थी. इसी दौरान पीछे की ओर से अचानक आए एक सांप ने उसे डंस लिया. सर्पदंश के बाद उसकी हालत गंभीर होने लगी.
परिजन बिना देर किए बच्ची को इलाज के लिए रेफरल अस्पताल अमौर लेकर पहुंचे.
चिकित्सकों ने तुरंत शुरू किया इलाज
अस्पताल में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एहतेमामूल हक के निर्देशन में चिकित्सकों की टीम ने बच्ची का तत्काल इलाज शुरू किया. सर्पदंश का असर गंभीर होने के कारण डॉक्टरों को इलाज के दौरान 55 वायल एंटी-वेनम इंजेक्शन देना पड़ा. इसके साथ ही बच्ची को अन्य आवश्यक उपचार और स्लाइन भी दिया जा रहा है.
चिकित्सकों के प्रयास के बाद बच्ची की हालत में काफी सुधार हुआ है.
समय पर अस्पताल पहुंचने से बची जान
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एहतेमामूल हक ने बताया कि बच्ची को समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया गया, जिसके कारण उसका इलाज तत्काल शुरू किया जा सका और उसकी जान बचाई जा सकी.उन्होंने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है. ऐसे में मरीज को जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना जरूरी है.
झाड़-फूंक में समय बर्बाद नहीं करने की अपील
डॉ. एहतेमामूल हक ने लोगों से सर्पदंश के मामलों में अंधविश्वास से बचने की अपील की. उन्होंने कहा कि कई लोग सांप काटने के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद कर देते हैं, जिससे मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है. उन्होंने लोगों से अपील की कि सर्पदंश की स्थिति में बिना देरी किए मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाकर तुरंत चिकित्सा उपचार कराएं.
