पूर्णिया के रूपौली से विजय कुमार सिंह की रिपोर्ट
Leopard Scare: पूर्णिया जिले के रूपौली प्रखंड अंतर्गत धूसर टीकापट्टी पंचायत के चकला मोड़ बहियार में बीते 27 मई को मक्के के खेत में घुसे हिंसक तेंदुए को उग्र भीड़ द्वारा मार गिराए जाने के बाद भी स्थानीय लोगों को खौफ से राहत नहीं मिली है. इलाके के किसानों और खेतिहर मजदूरों का दावा है कि बहियार में एक नहीं, बल्कि दो तेंदुए सक्रिय थे और दूसरा तेंदुआ अब भी इसी इलाके में कहीं घात लगाकर बैठा है. ग्रामीणों की इस गंभीर निशानदेही पर स्थानीय टीकापट्टी थाना पुलिस और वन विभाग (Forest Department) की संयुक्त टीम ने मक्के के खेतों से वन्यजीव के कुछ ताजा पंजों के निशान (पगमार्क) बरामद कर उन्हें सुरक्षित (संरक्षित) कर लिया है.
विशेषज्ञ करेंगे पंजों के निशान की वैज्ञानिक जांच: थानाध्यक्ष
खेतों में मिले पंजों के निशानों की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारियों ने त्वरित वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई है.
- साक्ष्यों का संग्रहण: पुलिस और वन विभाग की तकनीकी टीम ने चकला मोड़ बहियार से मिले पंजों के निशानों की हाई-डेफिनिशन तस्वीरें ली हैं और उनकी प्रॉपर वीडियोग्राफी कराई है.
- फॉरेंसिक मिलान: वन विभाग के वन्यजीव विशेषज्ञ अब इन पंजों के आकार और गहराई की कड़ियों की बारीकी से पड़ताल करेंगे. विशेषज्ञ यह जांचेंगे कि ये निशान पहले मारे जा चुके तेंदुए के हैं या फिर इलाके में मौजूद किसी दूसरे नरभक्षी तेंदुए के हैं.
प्रशासनिक मुस्तैदी: इस संबंध में टीकापट्टी थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार ने बताया कि ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोपरि है. ऐहतियात के तौर पर वन विभाग की एक विशेष रेस्क्यू टीम को प्रभावित क्षेत्रों और गांवों में चौबीसों घंटे कैंप करने के लिए तैनात रखा गया है. पंजों के निशानों को पूरी तरह संरक्षित कर जांच के लिए भेज दिया गया है. रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी.
“जान है तो जहान है” — दहशत में किसानों ने बंद किया मक्के का काम
इलाके में दूसरे तेंदुए के मंडराने की खबर और अफवाहों से धूसर टीकापट्टी पंचायत और आसपास के गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है.
- खेत जाने से कतरा रहे लोग: जिस चकला मोड़ बहियार में पिछले दिनों तेंदुए ने पांच किसानों को लहूलुहान किया था, उस ओर आज कोई भी ग्रामीण झांकने तक नहीं गया.
- मजदूरों का इनकार: घने मक्के के खेतों में कटनी और निकौनी का काम पूरी तरह ठप हो गया है. स्थानीय मजदूरों ने साफ लहजे में कहा है कि वे अपनी जान को जोखिम में डालकर खेतों में काम करने नहीं जाएंगे. किसानों का भी यही मानना है कि फसल से कीमती इंसानी जान है, इसलिए ‘जान है तो जहान है’.
हालांकि, गांव की गलियों में स्थानीय पुलिस की लगातार बढ़ाई गई गश्ती और वन विभाग की सक्रिय मौजूदगी को देखकर डरे-सहमे ग्रामीणों ने थोड़ी राहत जरूर महसूस की है. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अकेले या रात के समय खेतों की ओर न जाएं और किसी भी संदिग्ध आवाज या हलचल पर तुरंत पुलिस को सूचित करें.
