स्थापना दिवस पर जारी स्मारिका में पूर्णिया विवि में नामांकन से लेकर मूल्यांकन तक धांधली का जिक्र

स्थापना दिवस

पूर्णिया. बीते 18 मार्च को आठवे स्थापना दिवस पर जारी स्मारिका में पूर्णिया विवि में नामांकन से लेकर मूल्यांकन तक धांधली होने का जिक्र है. स्मारिका के पेज 141 से लेकर पेज 145 में ‘विश्वविद्यालय का बदलता स्वरूप अतीत से वर्तमान -अनुभवात्मक मूल्यांकन दृष्टि’ शीर्षक से छपे आलेख में पूर्णिया विवि के सकारात्मक पहलुओं से अधिक नकारात्मक पहलुओं का इंगित किया गया है. इस संबंध में पूछे जाने पर विवि मीडिया पदाधिकारी प्रो. संतोष कुमार सिंह ने बताया कि अभी तक उन्होंने स्मारिका का पूरी तरह से अवलोकन नहीं किया है. उन्होंने बताया कि स्मारिका में छपे आलेखों के लिए स्मारिका समिति पूरी तरह से जवाबदेह है. स्मारिका समिति के संयोजक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि शीर्षक के आधार पर आलेख का चयन किया गया. गौरतलब है कि स्मारिका के पेज 141 में स्नातक, स्नातकोत्तर व पीएचडी में नामांकन में प्रतिमा दमित होने की चर्चा है. पीजी नामांकन की मेरिट लिस्ट में बड़े पैमाने पर धांधली होने का दावा किया गया है. इसमें आरोप है कि सर्वाधिक अंक वाले बच्चे का नाम नामांकन मेरिट लिस्ट में था ही नहीं. प्रीपीएचडी 2023 में वैसे अभ्यर्थियों को पास किये जाने का आरोप है जिसे अपने विषय का सही से ज्ञान भी नहीं है. स्मारिका के पेज 142 में आरोप है कि दो माह बीत जाने पर भी आरटीआइ का जवाब नहीं दिया जाता है. स्मारिका के पेज 142 में यह भी आरोप है कि आंतरिक परीक्षा में सर्वाधिक अंक उन छात्रों को मिलता है जो शिक्षक के चहेते या उनकी अपनी जाति के होते हैं. इस बात को पुख्ता से रखने के लिए जिस मुहावरे का इस्तेमाल किया गया है , वह काफी गंभीर है. स्मारिका के पेज 143 में 2 वर्ष में हुई कक्षा को नाकाफी बताया गया है. यह भी दावा किया गया है कि गेस पेपर का सहारा लेना पड़ता है. 75 फीसदी उपस्थिति का हवाला देकर कहा गया है कि शिक्षा का स्तर अच्छा होता तो विवि को यूजीसी से 12 बी प्राप्त हो जाता. स्मारिका के पेज 144 में दावा किया गया है कि परीक्षा के साथ-साथ मूल्यांकन में गड़बड़ी पायी जाती है. सीजीपीए निकालने के तरीके पर भी आपत्ति जतायी गयी है. आरोप यह भी है कि परीक्षा ना देनेवालों को पास ही नहीं किया जाता , उसे अपने सत्र का गोल्ड मेडलिस्ट भी घोषित कर दिया जाता है. स्थापना दिवस समारोह के दौरान जारी की गयी स्मारिका के इस आलेख की शैक्षणिक परिसरों में खासी चर्चा हो रही है. फिलहाल, यह देखना है कि संज्ञान में आने के बाद विवि प्रशासन का इस मामले में कैसा रूख रहता है.

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