पूर्णिया से अखिलेश चंद्रा की रिपोर्ट
पूर्णिया शहर के व्यस्ततम फोर्ड कंपनी चौक पर स्थित 'बाबा पूर्णेश्वर नाथ शिव मंदिर' दशकों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक करने से जीवन के तमाम दुख-दर्द और विपदाएं दूर हो जाती हैं तथा मन को असीम शांति मिलती है.
दूर से ही आकर्षित करता है मंदिर का विशाल त्रिशूल
शहर के तीनमुहाने मोड़ पर स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर न केवल स्थानीय निवासियों, बल्कि मार्ग से गुजरने वाले हर राहगीर को अपनी ओर खींच लेता है. मंदिर के भव्य गुंबज पर स्थापित भगवान शिव का विशाल त्रिशूल दूर से ही भक्तों को भक्ति भाव से भर देता है.
सामान्य दिनों में भी यहाँ सुबह और शाम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. श्रद्धालु गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और पूजन सामग्री लेकर बाबा पूर्णेश्वर नाथ का आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं.
नब्बे के दशक में हुई थी मंदिर की स्थापना
मंदिर के इतिहास और धार्मिक महत्व के बारे में स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि:
- स्थापनाकाल: बाबा पूर्णेश्वर नाथ शिव मंदिर की स्थापना नब्बे के दशक में हुई थी.
- अन्य देवी-देवताओं का वास: मंदिर परिसर में भगवान शिव के अलावा मां काली, भगवान राधा-कृष्ण और अन्य कई देवी-देवताओं की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित हैं.
- विशेष स्थापत्य: यहाँ स्थित राधा-कृष्ण मंदिर की वास्तुकला और स्वरुप अन्य मंदिरों से काफी भिन्न व मनमोहक है.
सावन, सोमवार और महाशिवरात्रि पर रहता है विशेष मेला
सावन के पवित्र महीने, सोमवारी व्रत और महाशिवरात्रि जैसे पावन अवसरों पर मंदिर परिसर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है. सावन के दौरान यहाँ विशेष रूप से रुद्राभिषेक कराने वाले श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहती हैं.
दिनभर 'हर-हर महादेव' और 'ॐ नमः शिवाय' के गगनभेदी जयघोष से पूरा इलाका शिवमय बना रहता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में कुछ समय बिताने मात्र से ही अलौकिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
