महुआ घटवारिन नाटक का अभ्यास करते कलाकार | Prabhat Khabar Network

मीरगंज में फणीश्वर नाथ 'रेणु' की 'महुआ घटवारिन' का मंचन जल्द: रिहर्सल में कलाकारों ने फूंकी जान

फणीश्वर नाथ 'रेणु' की 'महुआ घटवारिन' का मंचन मीरगंज में. ग्रामीण युवा कलाकारों की जुझारू तैयारी और सधा हुआ अभिनय.

महान आंचलिक कथाकार फणीश्वर नाथ 'रेणु' की अमर लेखनी एक बार फिर रंगमंच पर जीवंत होने जा रही है. जिले के मीरगंज स्थित मोहना टोल में 'सांस्कृतिक आंचल' संस्था द्वारा आयोजित 15 दिवसीय विशेष नाट्य कार्यशाला में इन दिनों ग्रामीण युवाओं और कलाकारों का उत्साह अपने चरम पर है.

कार्यशाला में शामिल प्रतिभागी रेणु जी की प्रसिद्ध कृति 'महुआ घटवारिन' नाटक के भव्य मंचन की तैयारियों में दिन-रात पसीना बहा रहे हैं. रंगमंच और अभिनय के विशेषज्ञों के सानिध्य में ग्रामीण पृष्ठभूमि के इन कलाकारों को संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा, शारीरिक संतुलन और मंचीय प्रस्तुति की बारीकियों को सीखने और समझने का बेहतरीन अवसर मिल रहा है.

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महुआ के सौदे का दृश्य देख कांप उठी रूह, रिहर्सल में दिखा सधा हुआ अभिनय

तैयारियों के क्रम में 'महुआ घटवारिन' के एक अत्यंत मार्मिक और भावनात्मक दृश्य के पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) के दौरान कलाकारों ने अपने सधे हुए अभिनय से पूरे माहौल को भावुक कर दिया.

दृश्य में महुआ की सौतेली मां उसे एक क्रूर सौदागर के हाथों बेचने के लिए बेरहमी से कीमत तय करती है. वहीं दूसरी ओर सौदागर का संवेदनशील नौकर रामू इस अमानवीय सौदे का खुलकर विरोध करता है और महुआ को बचाने के लिए आगे आता है. महुआ की लाचारी, सौतेली मां की निष्ठुरता, सौदागर का लोभ और रामू के साहसिक प्रतिरोध के बीच उत्पन्न भावनात्मक द्वंद्व को कलाकारों ने जिस शिद्दत से निभाया, उसने उपस्थित सभी लोगों को स्तब्ध कर दिया.

प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में निखर रही ग्रामीण प्रतिभा

कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक नीलेश कुमार और सहायक प्रशिक्षक अंकित कुमार आर्य के कुशल मार्गदर्शन में ग्रामीण युवाओं को रंगमंच के कड़े अनुशासन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

प्रशिक्षकों का कहना है कि सुदूर ग्रामीण इलाकों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मंच और तराशने की जरूरत होती है. कार्यशाला के माध्यम से युवा न केवल अभिनय की कला सीख रहे हैं, बल्कि अपनी मिट्टी और आंचलिक साहित्य की जड़ों से भी गहराई से जुड़ रहे हैं. आगामी दिनों में होने वाले अंतिम मंचन को लेकर पूरे मीरगंज क्षेत्र में उत्सुकता का माहौल है.

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लेखक के बारे में

By सत्येन्द्र सिन्हा गोपी

सत्येन्द्र सिन्हा गोपी प्रिंट माध्यम में 25 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. आकाशवाणी एवं दूरदर्शन समाचार से पत्रकारिता की शुरुआत की. नाटक, कला संस्कृति, गीत संगीत, कृषि व मेडिकल क्षेत्र में विशेष अभिरुचि रखते हैं.

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