महफूज नहीं तंग गलियों में संचालित नर्सिंग होम

संकरी गली और दोनों तरफ खड़ी बाइक के बीच दमकल जाने की जगह नहीं

संकरी गली और दोनों तरफ खड़ी बाइक के बीच दमकल जाने की जगह नहीं

तंग गलियों के बीच संचालित पूर्णिया के अधिकांश नर्सिंग होम और कई क्लीनिक

पूर्णिया. प्रमंडल का बड़ा मेडिकल हब कहे जाने वाले लाइन बाजार की तंग गलियों के बीच चल रहे नर्सिंग होम और निजी क्लीनिक अगलगी या अन्य किसी हादसे के नजरिये से महफूज नहीं हैं. ईश्वर न करे, पर यदि कहीं कोई बड़ी घटना हो जाए तो तंग गलियों में दमकल का घुसना भी मुश्किल है. यह विडम्बना है कि पूर्णिया के अधिकांश नर्सिंग होम तंग गलियों के बीच संचालित हैं. हालांकि नर्सिंग होमों में अपने तई ‘फायर सेफ्टी’ के आवश्यक उपकरण जरुर लगाए गये हैं पर उसकी क्षमता सीमित होती है. बड़ी घटनाओं में दमकल की जरुरत पड़ती है और मौजूदा हालात में तंग गलियों से दमकल का गुजरना सहज नहीं.

गौरतलब है कि शहर के लाइन बाजार में सीमांचल के विभिन्न जिलों से लेकर दूर दूर के मरीज प्रत्येक दिन अपना इलाज कराने बड़ी संख्या में आते हैं. इस वजह से यहां चिकित्सकों से लेकर विभिन्न नर्सिंग होम, पैथलोजी, जांचघर, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड सभी स्थानों पर सुबह से ही मरीजों की भीड़ उमड़नी शुरू हो जाती है. मरीजों की हर दिन बढती संख्या को देखते हुए यहां लगातार नर्सिंग होम, पैथलोजी, जांचघर, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड आदि केन्द्रों की संख्या भी बढती जा रही है. कुछ नए स्थानों पर निर्माणाधीन हैं तो कई तैयार हो चुके हैं.

कई जगह बचाव के साधनों का अभाव

अगर देखा जाए तो शहर के अनेक नर्सिंग होम में सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है लेकिन कई ऐसे नर्सिंग होम भी संचालित हैं जहां वे तय मानकों के पूर्ण अनुरूप नहीं हैं. शहर के कई नर्सिंग होमों में यदि आग लग जाए तो यह बड़ी घटना का रूप ले सकती है. कई स्थानों पर भवन तो हैं लेकिन वहां अगलगी से बचाव के साधनों का सर्वथा अभाव है. जबकि ऐसे अनेक अस्पताल हैं जो पुराने भवनों एवं तंग गलियों के कोने में चल रहे हैं और तो और कई क्लीनिकों व नर्सिंग होम तक दमकल जाने तक का कोई पहुंच पथ भी नहीं है. हालांकि किसी भी नर्सिंग होम के संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित मानकों की जांच का प्रावधान है इसके तहत विभिन्न विभागों से प्रमाणपत्र लेने की भी आवश्यकता होती है इनमें से अग्निशमन विभाग द्वारा भी जांच के बाद प्रमाणपत्र निर्गत किया जाता है.

निबंधन में छूट से हो रही मानकों अनदेखी

स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व के समय में किसी भी नर्सिंग होम के संचालन के लिए निबंधन की आवश्यकता होती थी जिसमें सभी निर्धारित मानकों यथा कार्य के अनुरूप भवन की स्थिति, बायोवेस्ट मेनेजमेंट, फायर प्रोटेक्शन आदि सम्बन्धी के प्रमाणपत्र सम्बंधित विभागों से प्राप्त करना होता था. इन सभी प्रमाणपत्रों के आधार पर ही सम्बंधित क्लीनिकों का निबंधन किया जाता था. लेकिन हालिया समय में 40 बेड तक वाले क्लीनिकों एवं नर्सिंग होम के संचालन के लिए उन्हें सरकारी निबंधन में छूट मिल जाने के कारण लोग इन आवश्यक व्यवस्था के प्रति उदासीन हो गये हैं. इधर, विभाग का कहना है कि भले ही उनके 40 बेड से कम वाले क्लीनिकों और नर्सिंग होम के निबंधन के लिए उन्हें छूट दी गयी है लेकिन इसका कत्तई मतलब यह नहीं कि उनके द्वारा निर्धारित मानकों को नजरअंदाज किया जाए.

बगैर निबंधन के चल रहे कई सेंटर

सरकारी स्तर पर निबंधित अस्पताल और अन्य सम्बन्धित केन्द्रों कीसंख्या और शहर में संचालित नर्सिंग होमों की संख्या में तालमेल नहीं दिखता. सिविल सर्जन कार्यालय में दर्ज सूची के अनुसार पूर्णिया जिले में निबंधित नर्सिंग होम व अस्पतालों की संख्या 170 है वहीं 336 पैथलोजी और 7 एक्सरे केंद्र ही निबंधित हैं. जबकि जिले में बड़ी तायदाद में अस्पताल, नर्सिंग होम व विभिन्न जांच घर धड़ल्ले से चलाये जा रहे हैं. जिला प्रशासन द्वारा भी ऐसे अस्पतालों की जांच और कार्रवाई के लिए विभाग को लगातार अभियान चलाने का आदेश दिया गया है. वहीं मिली जानकारी के अनुसार अग्निशमन विभाग ने हाल ही में स्वास्थ्य विभाग से सम्पूर्ण जिले में निबंधित नर्सिंग होम एवं क्लीनिकों की सूची हासिल की है.

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आंकड़ों पर एक नजर

170 है निबंधित नर्सिंग होम व अस्पतालों की संख्या

336 पैथलोजी निबंधित हैं जिले में07 एक्सरे केंद्र मात्र निबंधित हैं जिले में—————————

बोले सिविल सर्जन

जिले में संचालित विभिन्न अस्पतालों और नर्सिंग होम का समय समय पर विजिट किया जाता है. बगैर मानक के संचालित किये जाने वाले अस्पतालों की शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी की जाती है. पूर्व में भी ऐसे अस्पतालों के खिलाफ जांच और कार्रवाई करते हुए उन्हें शील किया गया है.

डॉ प्रमोद कनौजिया, सिविल सर्जन

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By AKHILESH CHANDRA

AKHILESH CHANDRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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