रेलवे स्टेशनों के साथ बस स्टैंड पर भी दिख रही यात्रियों की भीड़
रिजर्वेशन काउंटर पर सुबह से लग रही यत्रियों की लंबी कतार
पूर्णिया. होली खत्म होने के दूसरे ही दिन से ट्रेनों में भीड़ बढ़ने लगी है. पर्व में अपने गांव और घर आए परदेशी बाबू अब अपने-अपने काम पर लौटने लगे हैं. सीमांचल एक्सप्रेस समेत लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में यात्रियों की काफी भीड़ देखी जा रही है जबकि कटिहार तक जाने वाली ट्रेनों में भी ट्रेन पर सवार होने और जगह पाने के लिए मारामारी की नौबत है. लोग कटिहार से दिल्ली और पंजाब व अमृतसर जाने वाली ट्रेन पकड़ेंगे. अमूमन यही स्थिति पूर्णिया कोर्ट स्टेशन की भी है जहां दिल्ली और लुधियाना जाने वाले लोगों की भीड़ काफी अधिक है. इधर, पर्व को लेकर रिजर्वेशन की लंबी वेटिंग है. रिजर्वेशन काउंटर पर भी यात्री सुबह से रेल टिकट के लिए कतार में खड़े हो रहे हैं.दरअसल, होली का पर्व खत्म होने के बाद काम पर लौटना लोगों की मजबूरी है. यही कारण है कि पूर्णिया जंक्शन से खुलने वाली हर ट्रेन में एक जैसा हाल है. जितने यात्री बैठे हैं, उससे कहीं ज्यादा लोग खड़े होकर कर रहे सफर करने की स्थिति में हैं. वैसे, होली संपन्न होने के बाद अभी बिहार से बाहर जाने वाली ट्रेनों में ज्यादा भीड़ है. भीड़ इतनी कि ट्रेन में चढ़ने के लिए मारामारी की स्थिति है. सीमांचल एक्सप्रेस में गुरुवार को स्लीपर बोगी में जनरल सा नजारा दिखा जबकि जनरल बोगी में जितने यात्री सीट पर थे, उससे ज्यादा खड़े दिखे. चूंकि सीधा दिल्ली के लिए यहां से ट्रेनों की कमी है इसलिए लोग जोगबनी और सहरसा से कटिहार जाने वाली ट्रेन में भी चढ़ रहे हैं ताकि कटिहार से वे अपने गंतव्य के लिए सीधी ट्रेन पकड़ सकें. दूसरी ओर बनमनखी की सवारी भी खूब हो रही है क्योंकि वहां से अपेक्षाकृत ट्रेन की सुविधा अधिक है.
यात्रियों की संख्या के आगे कम पड़ रही ट्रेन
पूर्णिया जंक्शन हो या फिर कोर्ट स्टेशन, पूर्णिया के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या के आगे ट्रेनें कम पड़ रही है. हर किसी को वाोस काम पर लौटने की जल्दी है पर उस हिसाब से यहां ट्रेन कम हैं. सीमांचल एक्सप्रेस से दिल्ली जाने वाले ट्रेन के इंतजार में बैठे प्रदीप सिन्हा कहते हैं कि पूर्णिया जंक्शन से लंबीदूरी कीट्रेनों की संख्या बढ़ायी जानी चाहिए. आलम यह था कि ट्रेन की हर बोगी के सामने चढ़ने के लिए लोग बेताब थे. पूछने पर उन्होंने कहा कि क्या करें, कोई उपाय नहीं है. उनकी पत्नी ने कहा कि हर साल होली के समय इसी तरह घर आते-जाते हैं. रेलवे को लंबी दूरी की ट्रेनों की संख्या बढ़ाने पर किसी का ध्यान नहीं है. यह परेशानी अकेले श्री सिन्हा और उनके परिवार की नहीं थी बल्कि कई लोग ट्रेन पर सवार होने की आपाधापी से काफी परेशान थे.
