Nagar Panchayat: पूर्णिया के अमौर से सुनील कुमार की रिपोर्ट: पूर्णिया जिले के अमौर नगर पंचायत में करीब दो करोड़ रुपये के विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है. आरोप है कि तत्कालीन बोर्ड और अधिकारियों की मिलीभगत से बाजार मूल्य से चार गुना अधिक कीमत पर विभिन्न सामग्रियों की खरीद की गई और राशि की पूरी निकासी (पेमेंट) होने के बावजूद धरातल पर कई महत्वपूर्ण योजनाएं आज भी अधूरी लटकी हुई हैं. यह पूरा घोटाला निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Bureau) के हत्थे चढ़ चुके अमौर के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार के कार्यकाल का बताया जा रहा है.
इस सनसनीखेज मामले को लेकर वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि गड़बड़ी से संबंधित सभी महत्वपूर्ण फाइलों और संचिकाओं को निकाल कर गहनता से प्रशासनिक जांच की जा रही है. दोषी पाए जाने वाले संवेदकों (ठेकेदारों) और तत्कालीन तकनीकी कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
झंडे से लेकर वाटर एटीएम तक की खरीद में लूट, ये हैं मुख्य योजनाएं
अमौर नगर पंचायत के आधिकारिक रिकॉर्ड से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं. सरकारी फंड की निकासी जिन मदों में की गई, उनकी जमीनी हकीकत कुछ इस प्रकार है:
- विशाल राष्ट्रीय ध्वज: नगर पंचायत परिसर में एक वीआईपी राष्ट्रीय ध्वज (झंडा) लगाने के नाम पर 9,75,999 रुपये की भारी-भरकम राशि निकाल ली गई.
- हाई मास्ट लाइट: नगर क्षेत्र के विभिन्न चौराहों पर 12 यूनिट हाई मास्ट लाइट लगाने के लिए 95,45,000 रुपये का भुगतान किया गया, जिसकी दरें बाजार मूल्य से काफी अधिक बताई जा रही हैं.
- बस स्टॉप निर्माण: क्षेत्र में 5 यूनिट आधुनिक बस स्टॉप बनाने के लिए 60,00000 (साठ लाख) रुपये की निकासी की गई, लेकिन वर्तमान में बस स्टैंड का कार्य पूरी तरह अधूरा पड़ा हुआ है.
- वाटर एटीएम: आम जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 5 यूनिट वाटर एटीएम के नाम पर 36,00000 (छत्तीस लाख) रुपये निकाले गए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इसमें से अधिकांश वाटर एटीएम उद्घाटन के कुछ दिनों बाद से ही खराब और कबाड़ में तब्दील पड़े हैं.
यह बहुत संगीन मामला है, उच्चस्तरीय जांच कराकर ही दम लेंगे: विधायक अख्तरूल इमान
अमौर नगर पंचायत कार्यालय सभागार में आयोजित सामान्य बोर्ड की बैठक में भाग लेने पहुंचे अमौर के स्थानीय विधायक अख्तरूल इमान ने इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा:
“पिछले 2 सालों के भीतर अमौर नगर पंचायत में संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में घोर और अमानवीय अनियमितता बरती गई है. क्षेत्र की जनता आज भी नारकीय स्थिति में है— न सड़कें बन सकीं, न जल निकासी के लिए नालियां बनीं और न ही सड़कों के गड्ढे भरे जा सके. लेकिन पूर्व ईओ संतोष कुमार के कार्यकाल में कागजों पर करोड़ों की योजनाएं पूरी दिखाकर बंदरबांट कर ली गई. सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि नगर पंचायत की सशक्त स्थाई समिति के सदस्य भी कह रहे हैं कि उन्हें इन भुगतानों के बारे में कुछ अंधेरे में रखा गया. यह एक बड़ा और संगीन आपराधिक मामला है. हमने सदन में निर्णय लिया है कि इन तमाम योजनाओं की एक उच्च स्तरीय तकनीकी जांच (High-Level Inquiry) कराई जाएगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा.”
जब तक आय-व्यय का पूरा ब्यौरा नहीं मिलता, नया प्रस्ताव पास नहीं होने देंगे: पार्षद
नगर पंचायत की सामान्य बोर्ड की बैठक में उस समय गतिरोध उत्पन्न हो गया जब वार्ड पार्षदों ने एकजुट होकर पिछले दो वर्षों के संपूर्ण आय-व्यय का लेखा-जोखा (फाइनेंशियल स्टेटमेंट) सार्वजनिक करने की मांग उठा दी. मुख्य पार्षद दिलआरा बेगम और उपमुख्य पार्षद सकीना की मौजूदगी में पार्षदों ने वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी को एक लिखित पत्र सौंपा.
नाराज पार्षदों ने साफ लहजे में अल्टीमेटम दिया है कि जब तक पूर्व के कार्यकाल का पूरा वित्तीय ब्यौरा सदन के पटल पर पारदर्शिता के साथ नहीं रखा जाता, तब तक वे नगर विकास से जुड़े किसी भी अन्य नए एजेंडे या वित्तीय प्रस्ताव पर न तो कोई चर्चा करेंगे और न ही अपनी सहमति (हस्ताक्षर) देंगे. पार्षदों के इस कड़े रुख के बाद अब देखना यह होगा कि वर्तमान प्रशासन इस वित्तीय घोटाले की परतें कितनी जल्दी खोल पाता है.
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