Purnia news : पूर्णिया के बहुमंजिला बाजार को नहीं मिली मंजिल

Purnia news : भले ही इसका नाम बहुमंजिला बाजार है, लेकिन यह सिर्फ एक मंजिल तक ही सिमट कर रह गया.

Purnia news : अपने विकास की यात्रा में पूर्णिया जिले ने बेहद लंबी दूरी तय की है. चारों ओर से सैकड़ों गावों से घिरे इस जिले ने न सिर्फ शहर की ओर आनेवाले ग्रामीणों, बल्कि अन्य प्रदेशों से भी आये लोगों को अपने ह्रदय में जगह दी है. इसका परिणाम है कि जिला मुख्यालय में शायद ही कोई कोना बचा हो, जहां घनी आबादी न दिखायी दे. शुरुआती दिनों में बढ़ती आबादी और उसकी जरूरत को देखते हुए कई बिंदुओं पर प्रशासनिक पहल की गयी. यातायात से लेकर बाजार तक को विकसित किया गया. इसी क्रम में शहर के मुख्य क्षेत्र में बहुमंजिला बाजार की परिकल्पना की गयी, जहां सभी प्रकार की जरूरत के सामान की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के प्रयास किये गये. इसके लिए शहर में मुख्य रूप से कार्यभार जिला परिषद को दिया गया. 80 के दशक में एक बहुमंजिली इमारत को बाजार के रूप में तैयार करने के लिए परियोजना बनी. मार्केट के लिए नक्शे का निर्माण कराया गया और फिर उसका निर्माण कार्य शुरू हुआ. पहले तल के निर्माण में कुल छह मंजिल तक बनाने की तैयारी की गयी. इस वजह से नामकरण भी बहुमंजिला बाजार के रूप में ही किया गया. यहां के निवासियों को इस मार्केट को लेकर किसी महानगर के बाजार जैसी परिकल्पना के साकार होने जैसा महसूस होने लगा, लेकिन अफसोस, आज भले ही इसका नाम बहुमंजिला बाजार है, लेकिन यह बाजार सिर्फ एक मंजिल तक ही सिमट कर रह गया.

निर्माण के बाद मेंटेनेंस पर कभी नहीं दिया गया ध्यान

यहां के कारोबारियों के मुताबिक बहुमंजिला बाजार निर्माण की शुरुआत तत्कालीन उपविकास आयुक्त अजीत कुमार के समय में हुई. एक मंजिल के निर्माण के बाद वर्ष 1987 में विधिवत इस मार्केट की शुरुआत की गयी. उन दिनों समाहरणालय के इर्द-गिर्द सड़कों के किनारे के व्यवसायियों को प्राथमिकता के आधार पर इसमें जगह दी गयी. नक्शे के अनुसार कराये गये निर्माण की वजह से इस पूरे इलाके में आमने-सामने पंक्तिबद्ध 15-15 दुकानों के साथ सुनियोजित तरीके से चार रो बनाए गये. कुल मिलाकर तकरीबन 120 दुकानें तैयार की गयीं. अनेक तरह के संसाधनों के साथ व्यवसायियों ने बेहद उत्साह से यहां अपनी दुकानें शुरू कीं, लेकिन इसके बाद एक ओर जहां ऊपर की अन्य मंजिलें नहीं बन सकीं, वहीं इस मार्केट में किसी भी प्रकार का मेंटेनेंस कार्य नहीं हुआ. 36 वर्षों में इस मार्केट के दुकानदारों ने जिस भी प्रकार की मरम्मत की जरूरत समझी खुद के पैसों से कराया. आज हालात ऐसे हैं कि ऊपरी मंजिल के निर्माण के लिए जितने भी मोटे वजनदार सरिया को छत से ऊपर खड़ा किया गया था, उन्हें चोरों द्वारा भी क्षति पहुंचायी गयी है. कई सरिया तो जड़ से ही काट लिए गये हैं.

अधिकारियों व दुकानदारों में तालमेल का रहा अभाव

कई दुकानदारों की शिकायत रही है कि इस मार्केट को लेकर अधिकारियों और उनके बीच हुई तमाम बैठकों में तालमेल का बेहद अभाव रहा. उनके प्रस्तावों और उनकी परेशानियों पर ध्यान ही नहीं दिया गया. सिर्फ राजस्व की वसूली की गयी. आज बाजार मुख्य सड़क से नीचे चला गया है. नाले ऊपर हो गये हैं. बरसात में छतों से पानी का टपकना और मार्केट के अंदर पानी जमा हो जाना आम बात है. कुछ जगहों से छत भी टूट-टूट कर झड़ रही है. यहां आनेवाली महिलाओं के लिए टॉयलेट की भी समुचित व्यवस्था नहीं है. ले दे कर ठीक बगल में पे एंड यूज वाले शौचालय और यूरिनल हैं, लेकिन उनमें देखरेख की कमी है और वहां महिलाएं जाना ही नहीं चाहतीं.

नक्शे के साथ की गयी छेड़छाड़

कुछ व्यवसायियों ने बताया कि नक्शे के अनुसार बनाये गये बहुमंजिला बाजार के नक्शे के साथ कुछ लोगों ने छेड़छाड़ की है. उनका कहना है कि निर्धारित नक्शे में सभी दुकानों के शटर अंदर की ओर ही तय किये गये थे. बाहर वाहनों के लिए पार्किंग और साइकिल स्टैंड के लिए भी जगह रखी गयी थी, लेकिन बाद के दिनों में कई लोगों द्वारा बाहर सड़क की ओर दीवार को तोड़कर शटर बना लिया गया. इस वजह से दो तरह के नुकसान हुए, एक तो पार्किंग की जगह खत्म हो गयी और दूसरा मार्केट के अंदर के कारोबारियों के व्यापार पर इसका बुरा असर पड़ा. इस बारे में जिला परिषद अध्यक्ष वाहिदा सरवर ने कहा कि बहुमंजिला बाजार में दुकानों को लेकर कुछ परेशानियां हैं. बिल्डिंग काफी पुरानी हो चुकी है. उसमें काम कराया जाना बेहद जरुरी है. कई मामलों को लेकर विभाग और राज्य स्तर तक पत्राचार किया गया है. जिला परिषद के खाते में फंड की कोई कमी नहीं है.

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