सांसद ने महिला आरक्षण बिल का किया समर्थन

एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से हो आरक्षण

कहा- एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से हो आरक्षण पूर्णिया. लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हुए पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने स्पष्ट किया कि यह कदम जरूरी है, लेकिन इसमें सामाजिक न्याय का संतुलन होना चाहिए. उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण के भीतर एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण सुनिश्चित किया जाए, तभी यह कानून न्यायपूर्ण और प्रभावी होगा. उन्होंने कहा कि केवल सामान्य वर्ग की महिलाओं को लाभ देने से समाज के वंचित वर्ग फिर पीछे रह जाएंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि परिसीमन और जनसंख्या जैसे मुद्दों को इस बिल से जोड़कर मोदी सरकार द्वारा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है, जो संघीय ढांचे के लिए खतरनाक है. बिना सामाजिक और आर्थिक न्याय के कोई भी कानून अधूरा रहेगा और महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार नहीं मिल पाएगा. विधेयक पर चर्चा के दौरान सांसद श्री यादव ने अपनी बात रखते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किये. उन्होंने कहा कि यह बिल जिस तरीके से लाया गया है, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है. वर्ष 2014 की फ्री लेजिस्लेटिव काउंसिल पॉलिसी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विधेयक को कम से कम 30 दिनों तक सार्वजनिक परामर्श के लिए रखा जाना चाहिए, लेकिन इस संवैधानिक संशोधन की प्रतियां सांसदों को सत्र शुरू होने के महज दो दिन पहले दी गईं. इसके लिए न तो विशेषज्ञ समिति से चर्चा हुई और न ही राज्यों से कोई राय ली गयी. पप्पू यादव ने अपने संबोधन में कहा कि देश में महिलाओं की स्थिति आज भी बेहद चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से महिलाओं की पूजा तो हुई, लेकिन उन्हें वास्तविक सम्मान कभी नहीं मिला. सती प्रथा, दहेज, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा और यौन शोषण जैसे मुद्दे आज भी समाज में मौजूद हैं. महिला सुरक्षा के मुद्दे पर पप्पू यादव ने कहा कि देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े बेहद भयावह हैं. उन्होंने मणिपुर, नालंदा, पटना की नीट छात्रा के साथ पूर्णिया की कई दुष्कर्म जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए इसे लोकतंत्र का काला अध्याय बताया और कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार पूरी तरह विफल रही है.

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By ARUN KUMAR

ARUN KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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