सामाजिक समरसता का संदेश दे रहा दुर्गाबाड़ी में आयोजित पौष माह का ‘मगन मेला’

उमंग और उत्साह के माहौल में शुरू हुआ बंगाली समाज का दो दिवसीय मेला

उमंग और उत्साह के माहौल में शुरू हुआ बंगाली समाज का दो दिवसीय मेला

पहले दिन समाज के हर तबका ने उठाया बंगाली संस्कृति के खानपान का लुत्फ

मेला में ननवेज आइटम में कवाब के अलावा ‘भेटकी माछ’ का खास और महंगा डिश

पूर्णिया. बंगाल की संस्कृति और खानपान की खुशबू को अपने आंचल में समेटे शहर के भट्ठा दुर्गाबाड़ी में आयोजित पौष माह का ‘मगन मेला’ सामाजिक समरसता का संदेश दे रहा है. मेला के बहाने न केवल सामाजिक सामंजस्य को सशक्त करने की सार्थक पहल की गई बल्कि डिजिटल युग के मोबाइल के कारण अपनी भाषा और संस्कृति से बढ़ती दूरी का गतिरोध दूर करने का प्रयास भी किया गया. अहम यह रहा कि नई पीढ़ी को संस्कार और संस्कृति से भी रु-ब रु कराया गया. भट्ठा दुर्गाबाड़ी समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय मगन मेला के पहले दिन समाज का हर तबका पहुंचा और पारिवारिक परिवेश में बंगाली संस्कृति के खानपान के खास अंदाज का आनंद उठाया और अपनी खुशियां शेयर की.

शनिवार को सर्द हवाओं और कोहरे को चीड़ कर निकली चटख धूप के बीच दुर्गाबाड़ी परिसर में उमंग और उत्साह के साथ मगन मेला का आगाज हुआ. मेला परिसर में प्रवेश करते ही बंगाल में होने का अहसास होता है पर यहां न केवल बंगाली समाज बल्कि दूसरे समाज के लोग भी उसी उमंग में डूबे नजर आते हैं. यहां महिलाओं और युवाओं के साथ बच्चों की भीड़ अधिक दिखी. मेला में खाने-पीने के अलग-अलग कई स्टाल लगाये गये हैं जिसमें बंगाल के खानपान से जुड़े तमाम आइटमों को शामिल किया गया है. इनमें बंगाल का एक खास डिश कवाब के अलावा ‘भेटकी माछ’ भी है. यह बंगाल की महंगी मछली है जिसे कोलकाता से खास तौर पर मंगाया गया है. मेला के एक स्टॉल पर इस मछली के कॉकलेट एवं अन्य आइटम तैयार किए जा रहे हैं. खजूर गुड़ की खीर और मिठाई भी खास डिश में शामिल है जबकि अन्य वेज और नॉनवेज पकवानों के स्टॉल भी लगे हैं. मेला में बच्चे, जवान, बुजुर्ग और महिलाएं अलग-अलग स्टॉलों पर एक से बढ़कर एक आइटमों का स्वाद लेते हुए खूब इन्ज्वाय करते नजर आए.

दुर्गाबाड़ी पूजा समिति के अधिकारियों की मानें तो 15 साल के बाद इस मेला का आयोजन किया गया है. इस मेला में पूरे समाज को जोड़ने के लिए खानपान के साथ-साथ खेल कूद मनोरंजन के लिए कई गेमिंग प्वाइंट बनाए गये हैं. यहां शनिवार केबाद रविवार 11 जनवरी को भी लोग दिन के 2 बजे से शाम 8 बजे तक मेला का लुत्फ उठा सकते हैं. दुर्गाबाड़ी समिति की उपाध्यक्ष सोनाली चक्रवर्ती ने बताया कि बदलते परिवेश में सामाजिक सामंजस्य में आए गतिरोध को दूर करने में यह आयोजन सहायक सिद्ध होगा. आयोजन में दुर्गाबाड़ी समिति के अध्यक्ष डा. अमित कुमार भट्टाचार्य, सचिव सुचित्रो घोष उर्फ बाबू दा, कोषाध्यक्ष सुवोजित दास, उपाध्यक्ष तापस चंद्र दास, सोनाली चक्रवर्ती, सह सचिव गौतम आइच व सुदीप मित्र, संयुक्त सचिव देवव्रत सूद व श्रीकांत घोष, सागर भट्टाचार्य, गौतम बनर्जी, सुदीप मित्र समेत तमाम सदस्य लगातार परिश्रम करते आ रहे हैं.

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