पूर्णिया शहर की हृदयस्थली कहे जाने वाले भट्ठा बाजार के व्यस्त खीरू चौक पर स्थित भगवान श्री हनुमान का प्राचीन मंदिर स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए अटूट श्रद्धा व आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यूं तो प्रतिदिन सुबह और संध्या आरती के समय यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन मंगलवार और शनिवार के दिन मंदिर परिसर 'जय श्री राम' और 'जय बजरंगबली' के जयघोष से पूरी तरह गुंजायमान रहता है.
मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना और सिंदूर अर्पण से पवनपुत्र हनुमान भक्तों के सभी संकटों, व्याधियों और कष्टों को हर लेते हैं.
दुकानदारों का अटूट नियम: पहले दर्शन, फिर व्यापार की शुरुआत
भट्ठा बाजार पूर्णिया प्रमंडल का सबसे बड़ा और प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, जहां सैकड़ों दुकानें व बड़े प्रतिष्ठान संचालित हैं:
- दैनिक दिनचर्या का हिस्सा: इस बाजार के व्यापारियों और दुकानदारों की मंदिर के प्रति इतनी गहरी श्रद्धा है कि सुबह प्रतिष्ठान का शटर उठाने से पहले वे मंदिर पहुंचकर मत्था टेकना कभी नहीं भूलते.
- व्यापारिक बरकत का विश्वास: स्थानीय दुकानदारों का दृढ़ विश्वास है कि दिन की शुरुआत संकटमोचन के दर्शन और आशीर्वाद से करने पर पूरे दिन व्यापार में समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
वार्षिक अष्टयाम और रामनवमी पर तीन दिनों का विशाल भंडारा
मंदिर प्रांगण में वर्षभर धार्मिक व सामाजिक उत्सवों की श्रृंखला चलती रहती है:
- यूपी के कलाकारों का संकीर्तन: वर्ष में एक बार यहां बड़े पैमाने पर अखंड अष्टयाम-संकीर्तन का आयोजन अनिवार्य रूप से किया जाता है, जिसके लिए विशेष रूप से उत्तर प्रदेश से भजन गायकों व संगीत मंडलियों को आमंत्रित किया जाता है. इस दौरान पूरे भट्ठा बाजार को रंग-बिरंगी रोशनी और तोरण द्वारों से सजाया जाता है.
- रामनवमी पर महाभंडारा: रामनवमी के पावन अवसर पर विशेष पूजन-हवन के साथ लगातार तीन दिनों तक वृहद भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें जाति-धर्म के भेदभाव से परे पूरा शहर प्रसाद ग्रहण करने पहुंचता है.
पांच दशक का सफर: साधारण चबूतरे से भव्य देवालय तक
मंदिर की संरचना, इतिहास और सुगम कनेक्टिविटी की मुख्य विशेषताएं:
| प्रमुख पहलू | विवरण |
| इतिहास | लगभग 50 वर्ष (पांच दशक) पुराना इतिहास; शुरुआत में साधारण रूप में पूजा प्रारंभ हुई, बाद में जनसहयोग से भव्य मंदिर का रूप दिया गया |
| शिल्प एवं आकर्षण | मंदिर के शीर्ष शिखर पर स्थापित सात घोड़ों के रथ पर सवार भगवान सूर्य देव की भव्य प्रतिमा, जो दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है |
| रूट 1 (आरएन साव चौक से) | शहर के आरएन साव चौक से भट्ठा बाजार की मुख्य सड़क सीधे खीरू चौक मंदिर तक पहुंचाती है |
| रूट 2 (जेल चौक से) | जेल चौक के समीप से जिला स्कूल रोड होते हुए सीधे और सुगम मार्ग से मंदिर पहुंचा जा सकता है |
