नीम और पीपल की छांव में विराजे हैं संकटमोचन, टैक्सी स्टैंड रोड का 'बागेश्वरधाम मंदिर' बना आस्था का केंद्र

पूर्णिया शहर के हृदय में स्थित बागेश्वरधाम मंदिर, नीम और पीपल के विशाल वृक्षों के बीच विराजमान हनुमान जी की अलौकिक प्रतिमा के कारण भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है. विशेषकर मंगलवार और शनिवार को यहां सुंदरकांड पाठ का आयोजन होता है.

पूर्णिया शहर के हृदयस्थल टैक्सी स्टैंड रोड पर स्थित बागेश्वरधाम मंदिर शहरवासियों और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भगवान श्री हनुमान की अलौकिक प्रतिमा प्राकृतिक रूप से नीम और पीपल के विशाल वृक्षों के बीच प्रतिष्ठापित है. खासकर मंगलवार और शनिवार के दिन मंदिर प्रांगण में पवनपुत्र के दर्शन और पूजन-अनुष्ठान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.

हर मंगलवार को होता है सुंदरकांड का विशेष पाठ

सामान्य दिनों के अलावा मंगलवार को मंदिर का धार्मिक वातावरण बेहद अलौकिक हो जाता है. अलसुबह से ही भक्त बाबा बजरंगबली को जल, सिंदूर, चोला और प्रसाद चढ़ाने पहुंचते हैं.

  • सुंदरकांड पाठ: अमूमन हर मंगलवार को मंदिर परिसर में स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा सुंदरकांड पाठ का विशेष आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर भक्ति रस का आनंद लेते हैं.
  • रामनवमी पर विशेष अनुष्ठान: रामनवमी के पावन पर्व पर मंदिर को विशेष रूप से रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया जाता है तथा विद्वान पंडितों के आचार्यत्व में भव्य हवन एवं महापूजन संपन्न कराया जाता है.

स्थानीय लोगों के सहयोग से हुआ भव्य जीर्णोद्धार

स्थानीय निवासियों के अनुसार, पूर्व में यहां केवल नीम और पीपल के वृक्ष के नीचे हनुमान जी की एक छोटी सी प्रतिमा स्थापित थी.

हाल के वर्षों में आसपास के धर्मावलंबियों और श्रद्धालुओं के सामूहिक प्रयास से स्थान की महत्ता को देखते हुए भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. इसके साथ ही मंदिर में सफेद संगमरमर की नयनाभिराम हनुमान प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई, जिसके बाद से यहां भक्तों का तांता लगा रहता है.

कैसे पहुंचे मंदिर?

यह मंदिर पूर्णिया शहर के प्रमुख मार्गों से आसानी से सुलभ है:

  • राजस्थान सेवा समिति भवन के ठीक सामने यह मंदिर स्थित है.
  • पुराने टैक्सी स्टैंड से: यदि आप शहर की मुख्य सड़क पर हैं, तो पुराने टैक्सी स्टैंड से मंदिर महज कुछ ही दूरी (वॉकिंग डिस्टेंस) पर है.
  • वैकल्पिक मार्ग: श्रद्धालु खीरू चौक से होटल हर्षा होते हुए या लखन चौक से चित्रवाणी रोड के रास्ते भी आसानी से मंदिर प्रांगण पहुंच सकते हैं.


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लेखक के बारे में

By अरुण कुमार

अरुण कुमार प्रिंट माध्यम में 32 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर के पूर्णिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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