20 साल से सज रहा बप्पा का दरबार: गुलाबबाग में 14 सितंबर से गणेश उत्सव, देखें इस बार के प्रमुख आकर्षण

पूर्णिया शहर का गुलाबबाग 14 सितंबर से 10 दिवसीय महागणपति महोत्सव के रंग में रंग जाएगा. कारगिल विजय के जश्न से शुरू हुआ यह ऐतिहासिक आयोजन इस साल भव्य पंडाल, LED लाइटिंग और मटका फोड़ जैसे आकर्षणों के साथ नेपाल और बंगाल के श्रद्धालुओं को भी लुभाएगा.

पूर्णिया शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र गुलाबबाग में एक बार फिर 'गणपति बप्पा मोरया' की गूंज सुनाई देने वाली है. आगामी 14 सितंबर से शुरू होने वाले 10 दिवसीय ऐतिहासिक 'महागणपति महोत्सव' के लिए पूरे शहर और बाजार को भव्य रूप से सजाया जा रहा है.

जगह-जगह मूर्तिकार भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. गुलाबबाग के पूजन स्थल पर गणपति दरबार के लिए एक विशाल और भव्य पंडाल का निर्माण किया जा रहा है, जिसको लेकर स्थानीय लोगों और विशेषकर युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है.

कारगिल विजय के जश्न से जुड़ा है महोत्सव का इतिहास

गुलाबबाग में महागणपति महोत्सव का इतिहास बेहद गौरवशाली है. आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस महोत्सव का आगाज दो दशक पहले, कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की ऐतिहासिक विजय के जश्न के तौर पर हुआ था.

तब से लेकर आज तक, हर साल यह आयोजन और भी भव्य होता जा रहा है. इस 10 दिवसीय महोत्सव के दौरान प्रतिदिन विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें पूरा गुलाबबाग अपनी सक्रिय भागीदारी निभाता है.

भव्य पंडाल, एलईडी गेट और मटका फोड़ बनेगा मुख्य आकर्षण

आयोजन समिति की ओर से इस साल मेले को पहले से कहीं अधिक व्यापक और आकर्षक स्वरूप देने की तैयारी है:

  • भव्य दरबार: टेंट और पंडाल के कारीगर दिन-रात मेहनत कर भगवान गणेश के लिए एक विशाल दरबार तैयार कर रहे हैं.
  • आकर्षक लाइटिंग: पूजन स्थल और मेला परिसर तक पहुंचने वाले रास्तों पर रंग-बिरंगे एलईडी (LED) बल्बों के भव्य गेट बनाए जा रहे हैं, जो रात के समय आकर्षण का मुख्य केंद्र होंगे.
  • मेला और झूला: बच्चों और महिलाओं के मनोरंजन के लिए खेल-तमाशा, झूला, खिलौनों और व्यंजनों की कई दुकानें सजने लगी हैं.
  • मटका फोड़: 14 सितंबर से शुरू होकर 10 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव का समापन एक रोमांचक 'मटका फोड़' कार्यक्रम के साथ किया जाएगा.

नेपाल और बंगाल तक से पहुंचते हैं श्रद्धालु

महागणपति महोत्सव अब केवल पूर्णिया का स्थानीय आयोजन नहीं रह गया है. इस मेले में कोसी और सीमांचल क्षेत्र के अलावा पड़ोसी देश नेपाल और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में लोग बप्पा के दर्शन करने पहुंचते हैं.

स्थानीय निवासियों के घरों में दूर-दराज से मेहमानों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है. युवाओं की टोलियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि देर रात तक चलने वाले इस मेले में श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहे.

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लेखक के बारे में

By अखिलेश चंद्रा

अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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