बाबा बैद्यनाथधाम में जल चढ़ाने असम से चार कांवरिया पैदल निकले

21 दिन में 650 किमी पैदल यात्रा कर पूर्णिया पहुंचे ये चारो कांवरिये

21 दिन में 650 किमी पैदल यात्रा कर पूर्णिया पहुंचे ये चारो कांवरिये

पूर्णिया. ‘मुझे परवाह नहीं किसी और के साथ की, जब कृपा हो मुझ पर मेरे भोलेनाथ की’. कुछ इसी तरह के आस्था और विश्वास के साथ असम से चार कांवरिया पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए निकल पड़े हैं. 21 दिन में करीब 650 किलोमीटर की यात्रा कर मंगलवार की रात पूर्णिया पहुंचे हैं. अभी देवनगरी पहुंचने के लिए सुलतानगंज के रास्ते तकरीबन तीन सौ किमी और तय करना है. ये सभी कांवरिया असम के कामरूक जिले के निवासी हैं. इनमें इनमें गोपाल गोस्या, जयंता वैश्या, प्रहलाद डेका एवं मिथुन गोरुयक शामिल हैं. शहर के नेवालाल चौक स्थित हनुमान मंदिर में विश्राम करने के लिए रूके इन कांवरियों से प्रभात खबर की खास मुलाकात हुई. उन्होने बताया कि बीते 10 जुलाई को स्वालकुसी से चारों वैद्यनाथ धाम देवघर के लिए पैदल यात्रा शुरू की है. बुधवार 30 जुलाई को उनके यात्रा का 21 वां दिन है. अब तक उनके द्वारा 650 किलोमीटर की यात्रा पूरी हो चुकी है.

सुलतानगंज में जल लेकर देवघर के लिए प्रस्थान करेंगे

यात्री गोपाल गोरूया ने बताया कि यात्रा के दौरान 26 जुलाई को सिलीगुड़ी में नेवालाल चौक बसंत बिहार निवासी नित्यानंद केशरी से संपर्क हुआ था. जहां उन्होंने कहा था कि पूर्णिया के नेवालाल चौक पहुचने के बाद उनसे फोन पर संपर्क करेंगे. मंगलवार 11 बजे रात में नेवालाल चौक पहुंचे जहां नित्यानंद केशरी से संपर्क होने के बाद रात वहीं ठहरे और रात का खाना और सुबह का नास्ता उनके घर करने के बाद विदाई ली. यहां से नौगछिया, भागलपुर होते हुए सुलतानगंज पहुंचेंगे. जहां गंगा स्नान कर जल लेकर देवघर के लिए प्रस्थान करेंगे.

देवघर तक एक हजार किमी की होगी यात्रा

उन्होंने बताया कि दिन भर वे लोग पैदल यात्रा करते हैं और किसी मंदिर या फिर ठहराव वाले जगह पर रात्रि विश्राम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि देवघर पहुंचने के बाद उनलोगों की 1000 किलोमीटर की पैदल यात्रा हो जायेगी. चारों कांवरियों में गोपाल गोरुया सबसे अधिक उम्र 50 वर्ष के हैं.शेष तीन 30-31 वर्ष के हैं. गोपाल गोरुया ने बताया कि उनकी यात्रा का उद्देश्य देश में शांति और भाईचारा बने रहे.

पहलीबार पैदल लंबी यात्रा के लिए निकली

उन्होंने बताया कि इतनी लंबी दूरी की यात्रा वे चारों पहली बार कर रहे हैं. इससे पहले घर से मां कामख्या मंदिर की यात्रा पैदल की थी. इसके अलावा अपने घर स्वालकुसी से प्रत्येक वर्ष सावन में गोराही बेलतला में वशिष्ठ मंदिर की यात्रा पैदल करते रहते हैं. लेकिन इस वर्ष सावन में बाबा वैद्यनाथ धाम की यात्रा करने की योजना बनायी, जो कुछ ही दिनों में पूरा हो जायेगा. उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान जरूरत के सामान एवं कपड़े साथ ले लिया है. रास्ते में विश्राम के समय खुद खाना भी बना लेते हैं, इसके लिए बर्तन भी लिया है.

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Author: ARUN KUMAR

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