AICTE Research Grant Purnea Engineering College: अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), नई दिल्ली ने पूर्णिया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ECE) विभाग के दो शिक्षकों के शोध प्रस्ताव का चयन रिसर्च प्रमोशन स्कीम (RPS) – Lab to Market 2025-26 के तहत किया है. परिषद ने तीन वर्षीय परियोजना के लिए कुल 24 लाख रुपये का अनुदान भी स्वीकृत किया है.
इलेक्ट्रॉनिक्स चिप्स की दक्षता बढ़ाने पर होगा शोध
परियोजना का शीर्षक "Enhancing ASIC Efficiency Through Cooling and Sound Dampening" है. यह शोध AICTE के उभरते क्षेत्र Manufacturing and Industry 4.0 से जुड़ा हुआ है. इस परियोजना का उद्देश्य एप्लीकेशन-स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड सर्किट (ASIC) चिप्स की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए नई Cooling और Sound Dampening तकनीकों का विकास करना है.
दो युवा शिक्षकों को मिली बड़ी जिम्मेदारी
इस परियोजना के प्रधान अन्वेषक (Principal Investigator) डॉ. मोहित कुमार हैं, जबकि सह-प्रधान अन्वेषक (Co-Principal Investigator) डॉ. मो. शहबाज़ अख्तर हैं. दोनों पूर्णिया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं.
इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग को होगा लाभ
प्रधान अन्वेषक डॉ. मोहित कुमार ने बताया कि यह शोध ASIC चिप्स के तापमान को नियंत्रित रखने और संचालन के दौरान उत्पन्न होने वाले शोर को कम करने पर केंद्रित है. यदि परियोजना सफल होती है तो इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग को बेहतर प्रदर्शन वाली चिप्स उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. इससे भविष्य की तकनीकों को अधिक ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ बनाया जा सकेगा.
संस्थान की शोध क्षमता का मिला राष्ट्रीय सम्मान
पूर्णिया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने दोनों शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की मजबूत शोध संस्कृति का प्रमाण है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सफलता से अन्य शिक्षक भी राष्ट्रीय स्तर की वित्तपोषित शोध परियोजनाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित होंगे.
तीन वर्षों तक चलेगी परियोजना
AICTE द्वारा स्वीकृत इस परियोजना की अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है. परियोजना के लिए कुल 24 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है, जिसमें 14.56 लाख रुपये गैर-आवर्ती (Non-Recurring) और 9.44 लाख रुपये आवर्ती (Recurring) मद में उपलब्ध कराए जाएंगे. इस वित्तीय सहायता से शोध कार्य को आधुनिक संसाधनों और प्रयोगशाला सुविधाओं के साथ आगे बढ़ाया जाएगा.
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