पहिले आवे द नेताजी के इ बेर पसीना उतार देहब... काम के हिसाब त देवे ही पड़ी भाई...

पहिले आवे द नेताजी के इ बेर पसीना उतार देहब... काम के हिसाब त देवे ही पड़ी भाई...

चौराहों पर चुनाव चर्चा ———————— पूर्णिया. ‘अब समय आयब गेल छय सोनू बाबू, नेता जी अयबे करथौं… कहथौं, हमरे टा वोट दिहऽ…’ लच्छो बाबू के रुकते ही मुस्कुराए सोनू बाबू, बोले-‘पहिले आवे त द नेताजी के, इ बेर पसीना उतार देहब… काम के हिसाब त देवे ही पड़ी भाई…’ एतना तऽ बताना पड़ेगा न कि कौना अधिकार से वोट मांग रहिन हैं ! ई आप का कह रहे हैं सोनू बाबू, हम कुछु समझे नहीं… अरे, हमरो मगजवा में ई बात नहीं घुस रहा है कि नेताजी वोटवा काहे न मांगेंगे… उनका अधिकार तऽ हइये है… ! खिलखिला के हंस पड़े सोनूबाबू… सुधरे नहीं आप सब.. रह गये ठेठ का ठेठ,.. हम कोनो नया थोड़े बोल रहे हैं… आपलोग ही कहते हैं कि समाज और शहर के विकास के लिए काम करे वाला के ही वोट देंगे तऽ नेताजी से ई नहीं पूछ सकते हैं कि समाज के विकास में आपका का सब योगदान रहा है….?? अहां तऽ गजब कहलौं सोनू बाबू… नेताजी सं सवाल पुछबाक त हमर सभक अधिकार अछि… आसमान से टपक कऽ हमरा सं वोट मांगथिन आर हम द देबय से नय होय वाला छय… दोनों की बात सुनते-सुनते योगी झा बहस को आगे बढ़ाते हैं. इस बीच कई और लोग जुटजाते हैं. चुनावी मौसम में कभी जनता तो कभी नेता के बीच रहने वाले सोनू बाबू चर्चा के केन्द्र में आ गये थे. छूटते ही बोले, हमरा कहे का मतलब ई है कि पहिले जिनको हम सब चुनके पटना भेजे थे ऊ तऽ हमसबके नेता हैं… उनसे उनका काम पूछेंगे तो ऊ कुछ बतावेंगे … हम सबका पूछना और उनका बताना तो कर्तव्य भी है… हम ई कहना चाहते हैं कि इलेक्शन के सीजन में वैसन लोग वोट मांगे केलिए आ जाते हैं जिनको पहिचानते तक नहीं… कौनो काम किये रहेंगे तब ना पहिचानेंगे भाई… काम के हिसबवा तऽ देना ही पड़ेगा भाई…!!! चुनाव के दिन जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, लोगों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है. चौराहों के किसी सार्वजनिक स्थल पर दो-चार लोगों के जुटते ही चुनावी चर्चा छिड़ जाती है. मंगलवार की सुबह रेलवे स्टेशन के सामने के टी स्टॉल के बाहर लगे बेंच पर कई लोग नेताजी की लंबी कतार और वोट मांगने के अधिकार पर चर्चा कर रहे थे. देखते-देखते चौपाल सज जाता है जहां वोटिंग से पहले पब्लिक नेता जी की पोल खोलती नजर आती हैं. सबके सब नेताजी पर सवालों कीबौछार करने के मूड में नजर आते हैं और पूछने के लिए सबके पास सवालों की लंबी फेहरिश्त भी है.

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By AKHILESH CHANDRA

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