साहित्यकार की सर्जनाओं पर हुई परिचर्चा

मूर्द्धन्य साहित्यकार डॉ वरुण कुमार तिवारी

पूर्णिया. दिवस विशेष पर पूर्णिया के साहित्यप्रेमियों ने हिन्दी के मूर्द्धन्य साहित्यकार डॉ वरुण कुमार तिवारी सर्जनाओं पर विस्तृत चर्चा. चर्चाकारों ने डॉ. वरुण कुमार तिवारी के जीवन प्रत्यय के साथ उनके अब तक के साहित्यिक अवदान पर अपनी समीक्षाएं प्रस्तुत कीं. वक्ताओं ने कहा कि कोसी-पुत्र डॉ. तिवारी हिन्दी के वरिष्ठ अलोचक हैं. वे कोसी अंचल के सृजनशील हिन्दी साहित्य के गम्भीर अध्येता हैं. हिन्दी जगत में उनके रचनाकर्म को काफी प्रसिद्धि मिली है. उन्होंने कविता के साथ-साथ कोसी अंचल के प्रमुख कहानीकारों, उपन्यास लेखकों, नाटककारों, आलोचक-समालोचक तथा नये-पुराने लेखकों की कृतियों पर अपनी गंभीर विवेचना प्रस्तुत की है. इन पुस्तकों में कोसी अंचल के जन-जीवन, लोगों के सुख-दुख, हर्ष-विषाद, चिन्ताओं, समस्याओं चुनीतियों और विडंबनाओं को संवेदनात्मक धरातल पर चित्रित और विवेचित किया गया है. साहित्यांगन, चटकधाम एवं भगवान प्रसाद जायसवाल पुस्तकालय के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित इस परिचर्चा में कहा गया कि प्रोफेसर डा. वरुण कुमार तिवारी की आलोचनात्मक पुस्तक से गुजर कर यह स्पष्ट परिलक्षित होता है कि कोसी क्षेत्र साहित्य और संस्कृति की दृष्टि से कितना समृद्ध है. डॉ. तिवारी ने अब तक हिन्दी संसार को पांच कविता पुस्तकें, ग्यारह संपादित ग्रंथ, सैकड़ों लेख-आलेख तथा अन्य विधात्मक रचनाएं दी है. उनकी कविता पुस्तकें तीसरी दुनिया के लिए, अपने होने का अहसास, कुछ दूर रेत पर चलकर, क्षितिज पर एक पगडंडी, तथा चयनित कविताएं पाठकों के बीच काफी चर्चित हुई हैं. उनके मौलिक समीक्षा ग्रंथों में मधुकर गंगाधर की साहित्य साधना, पाठान्तर, सृजन-समीक्षा के अंतर्पाठ, कोसी अंचल का सृजनात्मक हिन्दी साहित्य, मधुकर गंगाधर का साहित्य : समग्र मूल्यांकन, तथा कोसी के हिन्दी शब्द शिल्पी पाठकों के बीच काफी सराहा गया है. उनकी कविताओं के मराठी, गुजराती और मैथिली में अनुवाद भी प्रकाशित हुए हैं. इस साहित्यिक परिचर्चा की अध्यक्षता संयुक्त रूप से आकाशवाणी पूर्णिया के पूर्व निदेशक विजय नंदन प्रसाद एवं सम्मानित कथाकार चन्द्रकिशोर जायसवाल ने की. प्रमुख वक्ताओं में साहित्यांगन के सचिव डॉ. रामनरेश भक्त, आशुकवि गिरिजानंद मिश्र, प्रियंवद जायसवाल, कवयित्री दिव्या त्रिवेदी, गोविन्द प्रसाद दास, एस.के. रोहितस्व पप्पू, पवन कुमार जायसवाल, कल्याणी चौधरी, पोषक जायसवाल, यमुना प्रसाद बसाक, अशोक चौधरी, राजेश चौधरी, रमेश चौधरी आदि मुख्य रुप से शामिल थे.

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