पुण्यतिथि पर पूर्णियावासियों ने पूर्व विधानसभाध्यक्ष को किया नमन
उठायी गई सुधांशु जी के नाम से पूर्णिया विश्वविद्यालय के नामकरण की मांग
पूर्णिया. बिहार विधानसभा के भूतपूर्व अध्यक्ष, प्रख्यात साहित्यकार और कला भवन के संस्थापक साहित्य वाचस्पति डॉ. लक्ष्मी नारायण सुधांशु जी को पूर्णियावासियों ने नमन किया. स्थानीय कला भवन में शुक्रवार को खास तौर पर आयोजित सुधांशु जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. सभा की अध्यक्षता डॉ सुधांशु जी के पुत्र प्रद्युम्न नारायण सिंह ने की जबकि सभा का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम वर्मा कर रहे थे. इस अवसर पर वक्ताओं ने सुधांशु जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तृत चर्चा की और हिन्दी साहित्य के विकास में उनके योगदान पर अलग-अलग प्रकाश डाला. कार्यक्रम कीअध्यक्षता करते हुए सुधांशु जी के पुत्र एवं और कला भवन ट्रस्ट के सचिव प्रद्युम्न नारायण सिंह ने कला भवन के अगल अलग विभागों के कार्यकलापों की जानकारी दी और डॉ सुधांशु जी कला भवन की स्थापना के पीछे की परिकल्पना साझा किया. श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिला अध्यक्ष कुमार आदित्य ने पूर्णिया विश्वविद्यालय का नाम डॉ. लक्ष्मी नारायण सुधांशु विश्वविद्यालय करने का प्रस्ताव रखा और कहा कि इस पर यदि अमल नहीं किया गया तो आंदोलनात्मक गतिविधियां शुरू की जाएंगी. ,इस मांग की गंभीरता को दर्शाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो इसके लिए सड़क पर उतरकर संघर्ष भी किया जाएगा. मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सुधांशु जी साहित्य और राजनीति के अनूठे संगम थे. आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी कई लोग आए और गए लेकिन इस क्षेत्र में न तो दूसरा कला भवन हुआ और न ही कोई दूसरा पूर्णिया कॉलेज बन पाया. यह डॉ सुधांशु जी के विराट हृदय और इच्छाशक्ति दर्शाता है,इस अवसर पर जिला परिषद के उपाध्यक्ष नीरज कुमार उर्फ़ छोटू सिंह ने कहा कि डॉ. सुधांशु केवल एक राजनीतिज्ञ नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य के अनमोल रत्न थे. उन्होंने राजनीति में शुचिता और साहित्य में गहराई का जो मानक स्थापित किया, वह आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है. कवि एवं साहित्यकार डॉ कमल किशोर चौधरी ने कहा कि कला भवन की स्थापना उनके दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसने इस क्षेत्र में बौद्धिक चेतना जगाने का कार्य किया है. वरिष्ठ समाजसेवी दिनकर स्नेही ने काव्य में अभिव्यंजनावाद जैसे ग्रंथों को हिंदी आलोचना के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया. वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक जी ने कहा कि सुधांशु जी ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए संसदीय परंपराओं का बखूबी उपयोग किया. डॉ सुधांशु जी के पौत्र जयवर्धन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उनके विरासत का संरक्षण पर जोर देते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया. मौके पर प्रियव्रत नारायण सिंह,सुमित प्रकाश, अर्जुन सिंह,अभय कुमार चांद,अखिलेश कुमार,राहुल सिंह,मुन्ना सिंह,राज्यवर्धन, यश वर्धन आदि उपस्थित थे.
