बाबा धीमेश्वर धाम में होते हैं रामेश्वरम जैसे शिवलिंग के दर्शन: मनिहारी से पैदल चलकर जल चढ़ाते हैं कांवरिए

Dhemeshwar Dham Purnia: पूर्णिया के बनमनखी स्थित बाबा धीमेश्वर धाम महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है. मान्यता है कि यहां स्थापित पारदर्शी आपरूपी शिवलिंग हूबहू दक्षिण भारत के प्रसिद्ध रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग जैसा है, जहां मन्नत मांगने कोसी-सीमांचल सहित नेपाल और बंगाल से भी लोग पहुंचते हैं.

पूर्णिया के बनमनखी से रामदेव की रिपोर्ट

Dhemeshwar Dham Purnia: पूर्णिया जिला अंतर्गत बनमनखी प्रखंड से सटे पूर्व-उत्तर दिशा में काझी हृदयनगर पंचायत के धीमा ग्राम में अवस्थित बाबा धीमेश्वर धाम धार्मिक और ऐतिहासिक आस्था की एक अटूट कड़ी है. इस मंदिर में स्थापित आपरूपी (स्वयंभू) शिवलिंग अपनी अलौकिक बनावट के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. इस शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता इसका पारदर्शी होना है, जिसमें पूजा करने आने वाले श्रद्धालुओं को अपना प्रतिबिंब (परछाईं) साफ-साफ दिखाई देता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देश में इस प्रकार का पारदर्शी शिवलिंग केवल सुदूर दक्षिण के रामेश्वरम धाम में ही अवस्थित है. यही कारण है कि स्थानीय लोग और शिवभक्त इस पावन स्थल को ‘मिनी बाबाधाम’ के रूप में संधारित कर पूजते हैं.

मनिहारी गंगा घाट से 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय करते हैं शिवभक्त

प्रत्येक वर्ष श्रावण मास (सावन) में हजारों-हजार की संख्या में शिवभक्तों और कांवरियों का जत्था कटिहार जिले के मनिहारी स्थित उत्तर वाहिनी गंगा घाट पहुंचता है. वहां से अपने कांवर में पवित्र गंगाजल भरकर श्रद्धालु बेहद कठिन और दुर्गम रास्तों से होते हुए लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा संधारित करते हैं. सावन की प्रत्येक सोमवारी को धीमा ग्राम पहुंचकर बाबा धीमेश्वर पर जलाभिषेक करने की यह परंपरा सदियों से अनवरत कायम है.

राजा हिरण्यकश्यपु के आराध्य और किले के भग्नावशेष से जुड़ी हैं कड़ियां

“पौराणिक कथाओं और जनश्रुतियों के अनुसार, असुर सम्राट राजा हिरण्यकश्यपु के आराध्य देव स्वयं भगवान भोलेनाथ ही थे. हिरण्यकश्यपु प्रतिदिन इसी आपरूपी शिवलिंग की मुख्य कमान संभालकर पूजा-अर्चना करते थे. इस मंदिर के ठीक पश्चिम में आज भी हिरण्यकश्यपु के ऐतिहासिक किले के भग्नावशेष बनमनखी प्रक्षेत्र में मौजूद हैं, जो इस स्थल की प्राचीनता को प्रमाणित करते हैं.”

चम्पानगर स्टेट के राजा की पहल और जनसहयोग से बना भव्य शिवालय

मंदिर के इतिहास की कड़ियों को टटोलें तो प्राचीन काल में यह पूरा क्षेत्र एक निर्जन और घने जंगलों से घिरा हुआ था. उस समय इस स्वयंभू शिवलिंग के ऊपर केवल एक फूस का छप्परनुमा घर बना हुआ था. सबसे पहले चम्पानगर स्टेट के तत्कालीन राजा ने यहां एक भव्य शिवालय बनाने का प्रयास और शिलान्यास किया था. कालांतर में धीमा ग्राम के स्थानीय शिवभक्तों, प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कप्तानों ने जनसहयोग (क्राउडफंडिंग) के माध्यम से चंदा एकत्र कर वर्तमान भव्य मंदिर का संधारण कराया. आज इस मनोरम और आध्यात्मिक परिसर में सालों भर भक्तों का तांता लगा रहता है.

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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