किलकारी के बच्चों ने बिखेरी कला के विविध रंगों की छटा, सीखी जीने की कला

सीखी जीने की कला

किलकारी के मंच पर कलाकारों ने दिखाया लोक नृत्य का जलवा

कभी मैथिली तो कभी मगही और कभी अंगप्रदेश के कराये दर्शन

सम्मान समारोह के साथ सम्पन्न हुआ राज्यस्तरीय लोक नाच उत्सव

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विश्व रंगमंच दिवस पर किलकारी के आंगन में आयोजित दो दिनों का राज्य स्तरीय लोक नाच उत्सव शुक्रवार को सम्मान समारोह के साथ सम्पन्न हुआ. इस दो दिवसीय उत्सव में किलकारी के बच्चों ने जहां बिहार की लोक कला के विविध रंगों की छटा बिखेरी वहीं जीवन के जीने की कला भी सीखी. योग गुरुओं ने इसके लिए कई टिप्स दिए. अलबत्ता इस राज्यस्तरीय उत्सव के बहाने पूरे बिहार से आए किलकारी के बच्चे अपनी कला प्रतिभा की छाप छोड़ गये. आतिथ्य भावना से लवरेज मेजबान बने पूर्णिया के किलकारी बाल भवन से जुड़े लोग दो दिनों तक लगातार व्यवस्था में जुटे रहे. पूर्णिया के कई उर्जावान लोग भी इसमें सहयोगी बने.

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जट जाटिन से समां बंधा तो झूमर नृत्य देख झूम उठे लोग

पूर्णिया. किलकारी के प्रांगण मे’ आयोजित राज्य स्तरीय लोकनाच उत्सव 2025 में किलकारी बिहार बाल भवन पटना द्वारा प्रस्तुत जट जाटिन नृत्य से पहले ही दौर में समां बंध गया. हालांकि कार्यक्रम की शुरुआत मेजबान टीम पूर्णिया ने स्वागत गीत से की थी पर जाट-जटिन के नृत्य प्रभावोत्पादक रहा. नृत्य की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए किलकारी सारण की ओर से लुप्तप्राय लौंडा नाच से रु ब रु कराया गया तो भागलपुर की टीम ने ‘झूमर’ जैसे नृत्य की दमदार प्रस्तुति दी. दरभंगा द्वारा सामा चकेवा जैसे महत्वपूर्ण पर्व को मंच पर परिभाषित करते हुए लोक नृत्य की जीवंत प्रस्तुति दी गई तो मगध की खुशबू को समेटे हुए गया की प्रस्तुति ‘हम गैनी पनिया भरे’ भी सबों को मोहित कर गया. गोदना गीत को मुंगेर प्रमंडल के कलाकारों ने जोरदार ढंग से प्रस्तुत किया. अंत में गोकुलपुर की विशेष नाच मंडली के कलाकारों ने लोक परंपरा भगैत की प्रस्तुति से पहले दिन के कार्यक्रम का समापन किया गया.

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योग और संवाद के दौरान दिए गये कई टिप्स

पूर्णिया. राज्य स्तरीय लोक नाच उत्सव के दूसरे दिन की दोपहर योग और संवाद के नाम रही. दूसरे दिन सबसे पहले योगा सत्र में आर्ट ऑफ लिविंग के संदर्भ को लेकर एक विशेष कक्षा का आयोजन किया गया, इसमें सभी प्रतिभागी शामिल हुए. परिचर्चा के लिए एक्सपर्ट गुरु के तौर पर विशेष कुमार ने सभी को जीवन के जीने की कला से सम्बंधित कई सारे टिप्स दिए और योग सिखाए. उन्होंने योग के संदर्भ में भी चर्चा करते हुए छात्रों को संयमित होने का गुरु मंत्र भी दिया. इसके बाद संवाद सत्र का आयोजन किया गया जिसमें बिहार की चर्चित नृत्यांगना और नृत्य गुरु सुदीपा बोस ने प्रतिभागियों को लोक नृत्य एवं शास्त्रीय नृत्य की बारीकियां बतायी और उसकी तकनीक से अवगत कराया. उन्होंने वैदिक मंत्रों का उच्चारण कर छात्र जीवन में ब्रह्मचर्य की महत्ता को समझाया. सुदीपा बोस ने कहा कि आप सभी देश के भविष्य हैं, आप अपनी प्रतिभा को जितना निखरेंगे आपका आत्मबल उतना विकसित होगा. इसलिए आप संयमित होकर अपने जीवन में आगे बढ़ें.

प्रतीक चिह्न प्रदान कर दिया सम्मान

इस मौके पर किलकारी परिवार की ओर से उन्हें प्रतीक चिह्न, कलाकृति युक्त एक झोला और सम्मान चादर भी प्रदान किए गए. इस विशेष संवाद सत्र में खास तौर पर किलकारी पूर्णिया के प्रमंडल समन्वयक त्रिदीप शील, एपीओ नेहा कुमारी, सीआरपी रुचि कुमारी, सहायक लेखा पदाधिकारी श्रेया कुमारी, संगीत प्रशिक्षक अमरनाथ झा एवं संगीत गुरु इन्द्रकांत झा तथा स्पीक मैके बिहार चैप्टर से संबंद्ध वरिष्ठ रंगगकर्मी व गिटार वादक स्वरूप दास, वरिष्ठ रंगकर्मी गोविन्द दास आदि मुख्य रूप से शामिल रहे.

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