बदलते मौसम ने बढ़ायी मुश्किलें, वायरल फीवर व सर्दी-खांसी के बढ़े मामले

जिले में मौसम के बदलते स्वरूप का नजारा चिकित्सा नगरी कहे जाने वाले लाइनबाजार में बखूबी दिखने लगा है.

पूर्णिया. जिले में मौसम के बदलते स्वरूप का नजारा चिकित्सा नगरी कहे जाने वाले लाइनबाजार में बखूबी दिखने लगा है. राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल सहित निजी चिकित्सकों के यहां भी वायरल फीवर सहित सर्दी खांसी व डायरिया प्रभावित मरीजों के पहुंचने का सिलसिला तेज हो गया है. होली त्यौहार के बीतते ही सोमवार को जीएमसीएच के ओपीडी में मरीजों की जबर्दस्त भीड़ देखी गयी. इनमें स्त्री एवं पुरुषों के अलावा छोटे बच्चों की भी अच्छी भीड़ रही. ज्यादातर मरीज सर्दी खांसी और बुखार से पीड़ित अपना इलाज कराने पहुंचे थे जबकि कुछ हड्डी सम्बन्धी समस्याओं को लेकर भी अपना इलाज कराने आये थे. जीएमसीएच ओपीडी की बात अगर की जाय तो सोमवार को लगभग 1600 मरीज अपना इलाज कराने पहुंचे थे.

छोटे बच्चों में बुखार संग डायरिया का भी रोग

छोटे बच्चों में भी मौसमी समस्याओं के साथ साथ डायरिया के मामले सामने आ रहे हैं. जीएमसीएच स्थित बच्चा वार्ड में भी सभी सीटों पर छोटे बच्चों का इलाज चल रहा है. जहां अमूमन प्रतिदिन आधा दर्जन से ज्यादा बच्चे एडमिट किये जा रहे हैं. एक तरफ मौसम का बदलता मिजाज तो दूसरी तरफ बीते होली का त्यौहार और चल रहे रमजान को लेकर चिकित्सकों ने लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति बेहद सजग रहने की सलाह दी है. चिकित्सकों का कहना है कि जिस तरीके से मार्च माह के मध्य में अचानक मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है इससे थोड़ी सी भी असावधानी इन बीमारियों का कारण बन सकती है. साथ ही अभी ठंड का मौसम बीता है और अचानक दिन के तापमान में बढ़ोतरी हो गयी है उससे भी मानव शरीर को एडजस्ट करने में थोड़ा वक्त लग सकता है. यही हाल जिले सहित लगभग सभी इलाकों के स्वास्थ्य केन्द्रों और रेफरल अस्पतालों में भी बनी हुई है. इनमें ज्यादातर सर्दी, खांसी, बुखार के साथ साथ उल्टी और दस्त मरीज शामिल हैं.

चिकित्सीय सलाह

शरद और गरम मौसम का ख्याल रखें

खान पान व रहन सहन में स्वच्छता का ध्यान रखें.

संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से बच्चों को बचायें.

छह माह तक के बच्चों को स्तनपान अवश्य कराएं

बासी और दूषित भोजन से बचें.

घर का बना ताजा और शुद्ध भोजन ही करें.

डायरिया की स्थिति में मरीज का निर्जलीकरण न होने दें.

ओआरएस अथवा नमक चीनी पानी का घोल बनाकर देते रहें.

यथा शीघ्र मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाएं.

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बोले सिविल सर्जन

बदलते मौसम में सभी को विशेष सावधानी रखने की जरूरत है. जिले के सभी प्रखंडों एवं अनुमंडलीय अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था सुदृढ़ है. मौसमी बीमारियों के अलावा डायरिया के लिए भी दवा, ओआरएस आदि की व्यवस्था परिपूर्ण है. विशेष रूप से आशा द्वारा भी आम लोगों को इस तरह की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है.

डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया, सिविल सर्जन

फोटो – 17 पूर्णिया 25

फोटो – 17 पूर्णिया 26- जीएमसीएच में उपस्थित मरीजों की भीड़

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