सड़कों पर सज रहा है बस और ऑटो स्टैंड, फेल हो जा रहे नियम-कायदे

फेल हो जा रहे नियम-कायदे

गिरिजा चौक पर संचालित हो रहा अवैध बस पड़ाव, किसीका ध्यान नहींचौराहे बने हैं अघोषित पड़ाव, आवाजाही में आम लोगों को होती है परेशानी

पूर्णिया. शहर का गिरिजा चौक जहां न तो कोई बस स्टैंड है और न ही ऑटो-टोटो का पड़ाव फिर भी बसें रुकती हैं और पैसेंजर लोड कर आगे निकलती हैं. ऑटो-टोटो का भी जमावड़ा लगा रहता है. इस अघोषित बस और ऑटो-टोटो स्टैंड के कारण आए दिन सड़कों पर आवाजाही में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है.वैसे, शहर में कहने के लिए तो एक बस स्टैंड हैं लेकिन गिरिजा चौक समेत कई चौराहों पर बस और ऑटो स्टैंड का संचालन हो रहा है. इस पर फिलहाल विभाग का ध्यान नहीं है जबकि यह रोजमर्रे की समस्या बन गई है. इससे यातायात व्यवस्था के साथ-साथ शहर की सूरत भी बिगड़ रही है. सड़क पर बसों का जमावड़ा बस स्टैंड के समीप से ही शुरू हो जाता है. सरकारी बस स्टैंड के दोनों तरफ सड़क पर बसें लगा कर बसकर्मी यात्रियों को चढ़ाते हैं. इससे जाम की भी समस्या उत्पन्न होती है. हालांकि पिछले एक-दो महीने से इसपर नियंत्रण की कोशिश की जा रही है और लगातार चालान भी काटे जा रहे हैं.बस आनर्स एसोसिएशन ने इस पर विरोध भी जताया है और कहा है कि स्टैंड गेट से निकलती बसों का चालान काटना अनुचित है. इधर, स्टैंड से निकलने के बाद कई बसें गिरजा चौक बीएसएनएल कार्यालय से लेकर प्रधान डाक घर के सामने सड़क किनारे रुक जाती हैं. नतीजतन, बसें इन जगहों पर खड़ी रहकर जाम का कारण बनती है. यात्रियों को चढ़ाने और उतारने का काम भी सड़क पर ही होता है. गिरजा चौक से धमदाहा, भवानीपुर, बिहारीगंज, बनमनखी, मधेपूरा, सहरसा, सरसी, रानीगंज, छातापुर आदि मार्गों के लिए यात्रियों को बैठाने के लिए निजी बसें सड़क से सटे खड़ी की जा रही हैं.

सीट फुल होने का किया जाता है इंतजार

बस स्टैंड से रोजाना सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, धमदाहा, बनमनखी रूट में चलने वाली बसें स्टैंड से खुलने के बाद गिरिजा चौक के पास खड़ी रहती है. पोस्ट ऑफिस के आगे सुबह से लेकर देर रात तक रुक-रुक कर अलग-अलग बसें आती रहती है. शहर के मुख्य चौराहे पर बेतरतीब तरीके से बसों के रहने से चौक पर जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है. इस दौरान गिरिजा चौक से चालक तब तक बस लेकर आगे नहीं बढ़ते जब तक बस की सीटें फुल नहीं हो जाती है.

ऑटो- टोटो के कारण सबसे ज्यादा परेशानी

गिरिजा चौक पहुंचते ही चारों तरफ ऑटो-टोटो का जमावड़ा दिख जाता है.कभी-कभी तो पैसेंजर लेने के लिए ऑटो-टोटो वाले ट्रैफिक सिग्नल की परवाह किए बगैर आर-पार होते नजर आते हैं. इस चौक से एक तरफ काझा-मीरगंज, दूसरी तरफ पूर्णिया कोर्ट-श्रीनगर, तीसरी तरफ लाइन बाजार-खुश्कीबाग के लिए ऑटो-टोटो की भीड़ लगी रहती है. चूंकि सड़क किनारे साइड करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है इसलिए सड़क पर ही जमावड़ा लगता है. निजी कार या बाइक वालों के साथ पैदल चलने वालों को भी इससे परेशानी हो जाती है. आलम यह है कि अघोषित बस व ऑटो-टोटो स्टैंड में वाहनों के उपर वाहनों की भीड़ एवं प्रतिस्पर्धा तेज रहती है जिसमें सारे नियम कायदे फेल हो जाते हैं.

इन चौराहों पर लगती हैं बसें

शहर के वैसे निकास द्वार जहां अघोषित रूप से थोड़ी देर के लिए बसें रूकती हैं. इनमें मरंगा चौराहा, गिरिजा चौक, लाइन बाजार चौक, उफरैल चौक, गुलाबबाग जीरो माइल, बेलौरी चौक प्रमुख रूप से हैं. बेलौरी से कटिहार एवं सोनाली के लिए वाहनें चलती हैं. वहां भी काफी भीड़ लगती हैं.

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