लगातार बढ़ रहे हैं पेट्रोल के दाम, कंपनी ने 10 रुपये की जगह कर दिया 7 से 8 रुपये प्रति किमी
डिलीवरी सेंटर के बाहर एकजुट होकर जमकर नारेबाजी कर रहे प्रदर्शनकारी कर्मियों का आरोप है कि कंपनी उनके साथ तानाशाही रवैया अपना रही है. हड़ताल का नेतृत्व कर रहे विकास कुमार सहित अन्य डिलीवरी पार्टनर्स ने बताया कि पिछले चार दिनों के भीतर पेट्रोल की कीमतों में 7 रुपये प्रति लीटर का बड़ा उछाल आया है, जिसके बाद आज पूर्णिया में पेट्रोल की कीमत 113 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.
ऐसी भीषण महंगाई और ईंधन के बढ़ते खर्च के बीच कंपनी ने उन्हें राहत देने के बजाय उनका प्रति किलोमीटर का मेहनताना 10 रुपये से घटाकर महज 7 से 8 रुपये कर दिया है. कर्मियों का कहना है कि इस रेट पर काम करना पूरी तरह घाटे का सौदा है. बाइक के रखरखाव (मेंतनेन्स), इंजन ऑयल और महंगे पेट्रोल के खर्च को निकालने के बाद उनके पास परिवार चलाने और दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने के लिए भी कुछ नहीं बचता है.
10 मिनट की ‘क्विक-डिलीवरी’ सेवा पूरी तरह थमी, वीकेंड पर ग्राहकों को हो रही भारी फजीहत
ब्लिंकिट मुख्य रूप से अपनी 10 मिनट के भीतर ग्रोसरी, ताजी सब्जियां, फल और अन्य रोजमर्रा के घरेलू सामानों की क्विक-डिलीवरी सेवा के लिए जाना जाता है. शनिवार और रविवार यानी वीकेंड के दिनों में इस ऐप पर ऑर्डर का दबाव सबसे अधिक रहता है.
लेकिन डिलीवरी बॉयज की इस सामूहिक हड़ताल के कारण पूर्णिया शहर के लाइन बाजार, भट्ठा बाजार, मधुबनी, कोर्ट स्टेशन सहित तमाम रिहायशी इलाकों में सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं. जब उपभोक्ता सामान मंगाने के लिए मोबाइल ऐप खोल रहे हैं, तो उन्हें ‘सेवाएं अस्थायी रूप से अनुपलब्ध’ (Services Temporarily Unavailable) का पॉप-अप मैसेज दिखाई दे रहा है, जिससे छुट्टी के दिन लोगों को रसोई और घर के जरूरी सामानों के लिए बाजारों की दौड़ लगानी पड़ रही है.
मैनेजर को सौंपा मांग पत्र, दरें बहाल होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
आंदोलनकारी कर्मियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं. उन्होंने अपनी उचित मांगों और समस्याओं से संबंधित एक लिखित मांग पत्र स्थानीय हब मैनेजर को सौंप दिया है.
कर्मियों का साफ कहना है कि जब तक कंपनी प्रबंधन उनके बढ़े हुए पुराने रेट (10 रुपये प्रति किलोमीटर) को दोबारा बहाल नहीं करता और पेट्रोल की महंगाई के अनुपात में अतिरिक्त भत्ता नहीं देता, तब तक उनका यह ‘हल्ला बोल’ आंदोलन और हड़ताल अनवरत जारी रहेगी. अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि शहर में अपनी ठप पड़ी सेवाओं और ग्राहकों की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए ब्लिंकिट कंपनी प्रशासन इस गतिरोध को दूर करने के लिए कर्मियों से क्या और कब तक बातचीत करता है.
पूर्णिया से विकाश वर्मा की रिपोर्ट:
