Bihar School Live Classes: पूर्णिया में विकसित लाइव क्लासेस मॉडल को अब राज्य स्तर पर नई पहचान मिल गई है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को "बिहार स्कूल लाइव क्लासेस" का शुभारंभ किया. योजना के प्रथम चरण में पूर्णिया स्थित अत्याधुनिक हब स्टूडियो से पटना जिले के सरकारी विद्यालयों में लाइव कक्षाओं का प्रसारण शुरू किया गया. आने वाले समय में इस व्यवस्था का विस्तार पूरे बिहार के सरकारी विद्यालयों तक किया जाएगा.
पूर्णिया से शुरू हुई राज्यव्यापी पहल
जिला स्कूल पूर्णिया में आयोजित कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार भी मौजूद रहे. उन्होंने यहां से लाइव क्लासेस का शुभारंभ किया. डीएम ने कहा कि "पूर्णिया लाइव क्लासेस" अब बहुत जल्द "बिहार लाइव क्लासेस" के रूप में पूरे राज्य में संचालित होगी. वर्तमान में पूर्णिया जिले के 265 विद्यालय इस व्यवस्था से जुड़े हुए हैं.
आईआईटी, नीट और बोर्ड परीक्षाओं की हो रही तैयारी
Bihar School Live Classes: डीएम ने बताया कि लाइव क्लासेस के माध्यम से कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई के साथ-साथ आईआईटी, नीट तथा बोर्ड परीक्षाओं की भी तैयारी कराई जा रही है. इस पहल से हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है और सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.
पूर्णिया मॉडल ने बनाया सफलता का नया रिकॉर्ड
पूर्णिया मॉडल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण इसके शैक्षणिक परिणाम हैं. वर्ष 2024 में लाइव क्लासेस से जुड़े एक छात्र ने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया. वहीं वर्ष 2025 में बनमनखी क्षेत्र के विद्यार्थियों ने राज्य में सातवां और आठवां स्थान हासिल कर इस मॉडल की उपयोगिता को साबित किया.
आधुनिक तकनीक से हो रही पढ़ाई
पूर्णिया में स्थापित डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से विषय विशेषज्ञ शिक्षक प्रतिदिन लाइव कक्षाएं संचालित करते हैं. 3डी एनीमेशन, डिजिटल कंटेंट, क्रैश कोर्स, टेस्ट सीरीज, रिकॉर्डेड लेक्चर और एआई आधारित अध्ययन सामग्री के जरिए विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है. जिन विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां भी छात्रों को समान गुणवत्ता की शिक्षा मिल रही है.
पूरे बिहार के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
कोविड-19 के दौरान शुरू हुई डिजिटल शिक्षण पहल को वर्ष 2023 में पूर्णिया में "हब एंड स्पोक मॉडल" के रूप में विकसित किया गया था. अब इसे पूरे बिहार में लागू किया जा रहा है. इस व्यवस्था से राज्य के दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समान रूप से उपलब्ध होगी.
