नीम और पीपल की छांव में विराजे हैं बजरंगबली, टैक्सी स्टैंड रोड का बागेश्वरधाम मंदिर बना आस्था का बड़ा केंद्र

Bageshwar Dham: पूर्णिया शहर के बीचो-बीच टैक्सी स्टैंड रोड पर स्थित बागेश्वरधाम हनुमान मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ मारुति नंदन की भव्य प्रतिमा दो अत्यंत पवित्र वृक्षों— नीम और पीपल के बीच विराजमान है, जहां हर मंगलवार को विशेष सुंदरकांड पाठ का आयोजन होता है.

पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट

Bageshwar Dham: पूर्णिया नगर क्षेत्र के हृदय स्थली कहे जाने वाले टैक्सी स्टैंड रोड में राजस्थान सेवा समिति भवन के ठीक सामने स्थित ‘बागेश्वरधाम मंदिर’ शहरवासियों की धार्मिक आस्था का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है. प्राकृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इस मंदिर की बनावट बेहद अलौकिक है. यहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान जी की संगमरमर से निर्मित भव्य प्रतिमा नीम और पीपल के दो विशाल वृक्षों के प्राकृतिक मिलन के बीच स्थापित है. इस अनूठे जुड़ाव के कारण सामान्य दिनों के अलावा प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को न केवल स्थानीय बल्कि पूरे पूर्णिया शहर से बड़ी संख्या में सनातनी धर्मावलंबी यहाँ दर्शन, पूजन और विशेष अनुष्ठान के लिए पहुंचते हैं.

हर मंगलवार को उमड़ती है भीड़, होता है संगीतमय सुंदरकांड पाठ

मंदिर में होने वाले नियमित और विशेष धार्मिक आयोजनों का विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से देखा जा सकता है:

  • श्रद्धा का मंगलवार: आम दिनों में यहाँ भक्तों का सामान्य आवागमन रहता है, लेकिन मंगलवार का दिन आते ही पूरा मंदिर परिसर जय श्रीराम और जय हनुमान के जयकारों से गूंज उठता है. सुबह से ही भक्त माता सीता की खोज और हनुमान जी के पराक्रम पर आधारित ‘सुंदरकांड’ का पाठ करने और विद्वानों के मुख से इसका श्रवण करने के लिए जुटने लगते हैं.
  • रामनवमी पर महाहवन: इसके अतिरिक्त, चैत्र नवरात्र और रामनवमी के पावन अवसर पर इस मंदिर को विशेष विद्युत सज्जा और फूलों से दुल्हन की तरह सजाया जाता है. इस दौरान बनारस और स्थानीय वेदाचार्य पंडितों द्वारा लोक कल्याण के लिए महायज्ञ एवं हवन अनुष्ठान संपन्न कराए जाते हैं.

हाल के वर्षों में स्थानीय लोगों के सहयोग से हुआ भव्य जीर्णोद्धार

इतिहास और निर्माण: स्थानीय बुजुर्गों और चश्मदीदों के अनुसार, इस स्थान का कोई सदियों पुराना लिखित इतिहास तो नहीं है, परंतु कुछ दशक पहले तक इन दोनों पवित्र पेड़ों (नीम-पीपल) के प्राकृतिक खोह के बीच हनुमान जी की एक छोटी सी सिंदूरी प्रतिमा स्थापित थी, जहां लोग धूप-अगरबत्ती दिखाते थे. हाल के वर्षों में, आसपास के प्रबुद्ध समाजसेवियों और रामभक्तों ने इस जगह की महिमा को देखते हुए चंदा एकत्रित किया और जगह के अनुरूप एक खूबसूरत, नक्काशीदार मंदिर का निर्माण कराया. जयपुर से विशेष रूप से मंगवाई गई श्वेत संगमरमर की बजरंगबली की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से ही यहाँ भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया.

मंदिर मार्ग मार्गदर्शिका: जानें कैसे पहुंचे बागेश्वरधाम

सुगम यातायात रूट:

यदि आप पूर्णिया शहर के बाहर से आ रहे हैं या मुख्य बाजार से मंदिर की ओर रुख करना चाहते हैं, तो यहाँ तक पहुँचने के लिए तीन बेहद सुगम और सहज रास्ते उपलब्ध हैं:

  1. लाइन बाजार / मुख्य सड़क से: शहर की मुख्य सड़क पर स्थित पुराने टैक्सी स्टैंड से इस मंदिर की दूरी महज ‘वॉकिंग डिस्टेंस’ (पैदल चलने योग्य दूरी) पर है, जहां कोई भी आसानी से टहलते हुए आ सकता है.
  2. भट्टा बाजार / खीरू चौक से: खीरू चौक से होटल हर्षा वाले मार्ग को पकड़कर भी सीधे इस मंदिर के द्वार तक पहुंचा जा सकता है.
  3. लखन चौक की ओर से: यदि आप बस स्टैंड या आरएन शाह चौक की तरफ से आ रहे हैं, तो लखन चौक से प्रसिद्ध चित्रवाणी सिनेमा रोड होते हुए बागेश्वरधाम मंदिर तक सहज रूप से ई-रिक्शा या निजी वाहन से आ सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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