सामूहिक विवाह के बहाने कायम की गयी सामाजिक सरोकार की मिसाल

सामाजिक जिम्मेदारी का किया निर्वाह

गरीब बेटियों का विवाह करा सामाजिक जिम्मेदारी का किया निर्वाह

आत्मीयता के साथ डाॅ एके गुप्ता व पिंकी गुप्ता ने किया कन्यादान

सनातन सेवा संघ ने पूर्णिया में डाली सामाजिक समरसता की नींव

पूर्णिया. सोमवार की देर शाम और किसी दुल्हन तरह सजा संवरा शहर का कला भवन. चारो तरफ बिजली की रंग बिरंगी लड़ियां, बड़े बड़े वैपर लाइट, बेहद जगमग करता आकर्षक पंडाल और गर्मजोशी और उत्साह के माहौल में सिनेमाई गीतों की धुन पर थिरकते-गुनगुनाते लोग… सबकुछ, वैवाहिक माहौल की जीवंतता की बानगी बयां कर रहे थे. मगर, यह किसी व्यक्ति विशेष का उत्सव नहीं था और यही इस आयोजन को खास बना गया जहां पूरी आत्मीयता के साथ गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह संस्कार करा कर न केवल एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह किया गया बल्कि सामाजिक सरोकार की एक मिसाल कायम की गई.

यह सच है कि पूर्णिया का कलाभवन अनेक सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों का गवाह रहा है पर यह पहला मौका है जब यहां सामूहिक विवाह का उत्सव आयोजित हुआ जिसमें वैसे निर्धन परिवारों की बेटियों का विवाह एक साथ कराया गया जिनके पास शादियां तय कर लेने के बाद भी रस्मोरिवाज के लिए आर्थिक परेशानियां आड़े आ रही थी. यह एक ऐसा आयोजन था जो सामाजिक एकता, समानता और गरीब परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए था. ग्रीन पूर्णिया के अध्यक्ष और जाने-माने सर्जन डा. अनिल कुमार गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी पिंकी गुप्ता ने पूरी आत्मीयता के साथ बड़ी जिम्मेदारी निभायी जबकि दीपक कुमार दीपू समेत सनातन सेवा संघ के तमाम सदस्यों ने सामूहिकता की भावना के साथ कई जोड़ों की एक साथ शादी संपन्न कराते हुए एकता और सौहार्द और समरसता की नींव डाली.

ऐतिहासिक पल के गवाह बने शहरवासी

कलाभवन के अंदर का माहौल किसी भव्य समारोह से कम नहीं था. विवाह स्थल पर एक बड़ा सा मंच जिस पर दाम्पत्य बंधन में बंधने आये सभी जोड़ों के बैठने के लिए अलग अलग सोफे रखे गये थे. उसके ठीक सामने के मंच पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहा था और इन दोनों के बीच लगाई गयी सैकड़ों कुर्सियों पर युगल जोड़ों के परिजनों के लिए बैठने का इंतजाम था. यह आयोजन अन्य स्थानीय लोगों के लिए भी अद्भुत उत्सुकता का केंद्र बना हुआ था. आयोजन में शरीक लोगों के अलावा बड़ी संख्या में विशिष्ट और आम लोग भी पहुंचे और इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने. इससे पहले रात के ठीक आठ बजे सजे धजे चार पहिया वाहनों में सर पर पगड़ी और कुर्ता शेरवानी में एक साथ कई दुल्हों को लेकर बैंड बाजे के साथ शोभायात्रा के रुप में बारात पहुंची, परंपरा का निर्वाह करते हुए जोरदार स्वागत भी हुआ और वरमाला और अन्य रस्मों के बीच सामूहिक विवाह के फूलों से सजे मंच पर गर्मजोशी और उत्साह का यह माहौल यादगार बन गया.

वर व कन्या पक्ष ने आयोजन को सराहा

सामूहिक विवाह में शामिल होने वाले वर एवं बधू परिवार के लोगों ने इस आयोजन पर अपनी दिली प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि उनके द्वारा ऐसे आयोजन की कल्पना नहीं थी. कन्या पक्ष के एक पिता ने बताया कि यह सब उनकी बेटी के भाग्य से संभव हुआ है वरना आज की शादी में कन्या पक्ष के खर्च को देखते हुए उनकी हिम्मत टूट चुकी थी. उन्होंने बताया कि उनका होने वाला दामाद पेशे से राजमिस्त्री है और वे खुद पंचायत भवन में बतौर सफाईकर्मी हैं उनके लिए तो यह सब एक सपने के समान लग रहा था. वहीं एक नव विवाहित जोड़े ने बताया कि उनकी शादी पिछले छह माह से लंबित थी इस आयोजन के विज्ञापन को देखने के बाद दोनों ही परिवारों के लोगों ने इस शादी के लिए हामी भरी और यह सामूहिक विवाह उनके लिए एक बेहतर मौक़ा साबित हुआ. कई नव दंपतियों ने इस आयोजन को देख प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा भी हो सकता है इसका उन्हें कतई अनुमान ही नहीं था.

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