पूर्णिया : कला एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन पूर्णिया के तत्वावधान में आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र, प्रेक्षागृह सह आर्ट गैलरी में चल रहे 15 दिवसीय विलुप्तप्राय लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन प्रशिक्षुओं ने झूमर, कजरी और सोहर लोकगीतों के साथ कजरी और पामरिया लोकनृत्य का प्रशिक्षण लिया. प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ लोकगीतों का गायन और लोकनृत्यों का अभ्यास किया.
लोक विधाओं की बारीकियों पर दिया जोर
प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को लोकगीत और नृत्य की बारीकियों से अवगत कराया. साथ ही इनकी पारंपरिक शैली, स्वरूप और मंचीय प्रस्तुति को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया. प्रशिक्षण के दौरान कलाकारों ने पारंपरिक लोकधुनों और नृत्य शैलियों का अभ्यास किया.
नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास
आयोजकों के अनुसार झूमर, कजरी और सोहर बिहार की सामाजिक और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी महत्वपूर्ण लोकगीत विधाएं हैं. वहीं कजरी और पामरिया लोकनृत्य क्षेत्र की समृद्ध लोक सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं.
कार्यशाला का उद्देश्य विलुप्तप्राय लोक परंपराओं को संरक्षित करना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है. इसके माध्यम से पारंपरिक लोक कलाओं से युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
8 सितंबर तक चलेगी कार्यशाला
प्रशिक्षण कार्यक्रम 8 सितंबर 2026 तक चलेगा. जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी पंकज कुमार पटेल ने बताया कि कार्यशाला में रजिस्ट्रेशन और नामांकन की प्रक्रिया अभी जारी है. इच्छुक प्रतिभागी इसमें शामिल हो सकते हैं. कार्यशाला में प्रशिक्षण पूरी तरह नि:शुल्क दिया जा रहा है.
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