भीषण आंधी और मूसलाधार बारिश से दर्जनों घर तबाह, तैयार मक्के की फसल बर्बाद होने से किसानों पर टूटा दुखों का पहाड़

Nature's fury in Amour: पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड क्षेत्र में बीती देर रात आए भीषण चक्रवातीय आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है. महज कुछ घंटों की इस प्राकृतिक आपदा में प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में व्यापक पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है. आंधी की रफ्तार इतनी खौफनाक थी कि दर्जनों गरीब परिवारों के आशियाने उजड़ गए, जबकि खेतों और खलिहानों में कटी व मली रखी साल भर की गाढ़ी कमाई (मक्के की फसल) पानी में डूबकर बर्बाद हो गई.

Nature’s fury in Amour: खुले आसमान के नीचे रात काटने को मजबूर हुए लोग, सड़कों पर गिरे पेड़ और बिजली ठप

जमीनी रिपोर्ट के अनुसार, रात में अचानक मौसम ने करवट ली और तेज कड़क के साथ धूल भरी आंधी चलने लगी. चक्रवात इतना तेज था कि कई महादलित व गरीब परिवारों के कच्चे घरों और फूस के मकानों के छप्पर हवा में तिनके की तरह उड़ गए. ग्रामीण इलाकों में कई घरों पर रखे टीन के चद्दर सैकड़ों मीटर दूर जाकर गिरे, जिसके कारण छोटे-छोटे बच्चों के साथ लोग रात भर भीगते हुए खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर रहे. इसके अलावा, अमौर प्रखंड की मुख्य संपर्क सड़कों और ग्रामीण रास्तों पर विशालकाय पेड़ों की टहनियां टूटकर गिर गईं, जिससे सुबह तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा. कई गांवों में बिजली के खंभों और मुख्य तारों पर भारी पेड़ गिरने से समूचे प्रखंड की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिसे चालू करने में विभाग को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है.

कर्ज लेकर की थी खेती, फसल गीली होने से अन्नदाताओं के सामने खड़ा हुआ आर्थिक संकट

अमौर के किसानों के लिए मौसम की यह बेरुखी किसी गहरे सदमे से कम नहीं है. इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मक्के की खेती होती है. वर्तमान में अधिकांश किसानों की मक्के की फसल खेतों से कट चुकी थी और कुछ जगहों पर थ्रेशर से मक्के की मलाई (दौनी) का काम चल रहा था. खलिहानों में रखे तैयार मक्के के दानों में पानी भर जाने के कारण फसल पूरी तरह गीली हो गई है, जिससे उसमें फंगस और सड़न लगने का खतरा पैदा हो गया है. पीड़ित किसान अनवर, रोहित, अनमोल, प्रकाश, अजय, मोहसिन और मोइन ने अत्यंत भावुक होकर बताया कि वे अपनी फसल को बाजार ले जाने की तैयारी में जुटे थे, लेकिन रात की आंधी-पानी ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया. वहीं किसान मनोज, अनमोल, अंजर और मुमताज ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि उन्होंने महाजनों और बैंकों से भारी कर्ज लेकर मक्के की बुआई की थी. उन्हें उम्मीद थी कि इस बार अच्छी उपज बेचकर वे अपना पुराना कर्ज चुकता कर देंगे, लेकिन कुदरत ने एक ही झटके में सब कुछ छीन लिया. अब उनके सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि वे अपने उजड़े हुए घर की छत की मरम्मत कराएं या अपने परिवार का पेट पालें.

रात भर ठनका की आशंका से सहमे रहे ग्रामीण, जनप्रतिनिधियों ने की मुआवजे की मांग

रात भर हुई इस प्राकृतिक हलचल, मूसलाधार बारिश और लगातार कड़कती बिजली (ठनका) के कारण पूरे प्रखंड के लोग गहरे खौफ और दहशत के साए में रहे. अनहोनी की आशंका के बीच ग्रामीणों ने जागकर किसी तरह रात काटी. सुबह होते ही ग्रामीण खुद ही कुल्हाड़ी और पारंपरिक औजारों से सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने और अपने आशियानों को दोबारा खड़ा करने की जद्दोजहद में जुट गए हैं. इस बीच, अमौर के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी प्रभावित पंचायतों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया. पीड़ित परिवारों की दयनीय स्थिति को देखते हुए जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन व अंचल अधिकारी (CO) से अविलंब मांग की है कि राजस्व कर्मचारियों की विशेष टीम भेजकर क्षति का त्वरित व निष्पक्ष आकलन कराया जाए, ताकि बेघर हुए परिवारों को आपदा राहत कोष से त्रिपाल, खाद्यान्न सामग्री और पीड़ित किसानों को उचित कृषि मुआवजा जल्द से जल्द मुहैया कराया जा सके.

पूर्णिया के अमौर से सुनील कुमार की रिपोर्ट:

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Published by: Divyanshu Prashant

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