साइंस फॉर सोसाइटी (पूर्णिया) के तत्वावधान में परोरा स्थित विद्या विहार आवासीय विद्यालय में 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026 के जिला स्तरीय दिशा-निर्देशन सह शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसमें जिले के सरकारी और निजी विद्यालयों के लगभग 290 विज्ञान शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया. कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया.
जल संरक्षण से ही मानव समाज का भविष्य सुरक्षित
कार्यक्रम में आए अतिथियों और शिक्षकों का स्वागत करते हुए जिला समन्वयक आलोक कुमार ने 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026 के मुख्य विषय ‘निरंतरता के लिए विज्ञान एवं नवाचार’ पर प्रकाश डाला. उन्होंने इसके उप-विषय 'जल संरक्षण' की चर्चा करते हुए कहा कि जल का संचय करके ही मानव समाज के भविष्य को सुरक्षित रखा जा सकता है.
इसके साथ ही ई. सत्यम कुमार ने प्रोजेक्ट निर्माण की बारीकियों को बेहद सरल तरीके से समझाया ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद शिक्षक बच्चों को प्रोजेक्ट तैयार करने में सही मार्गदर्शन दे सकें.
खान-पान की गलत आदतें और आधुनिकता बन रही बीमारी की वजह
विद्या विहार आवासीय विद्यालय के शैक्षणिक अध्यक्ष सह प्राचार्य निखिल रंजन ने उप-विषय 'भोजन, कृषि और स्वास्थ्य' पर विचार रखे. उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग पारंपरिक और स्वस्थ दिनचर्या को छोड़कर आधुनिकता को अपना रहे हैं. रोजमर्रा की छोटी-छोटी गलतियों और मिलावटी भोजन के कारण लोग कम उम्र में ही बीपी और शुगर (मधुमेह) जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं.
भारतीय ज्ञान प्रणाली और स्वास्थ्य का समन्वय
जिला शैक्षणिक समन्वयक संतोष कुमार ने उप-विषय 'निरंतरता के लिए भारतीय ज्ञान प्रणालियों का अनुप्रयोग' को प्राचीन काल से जोड़ते हुए आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि किस प्रकार योग, आयुर्वेद, जैविक खेती और औषधीय पौधों के प्रयोग से हम अपनी जीवनशैली को बेहतर और शरीर को तंदुरुस्त रख सकते हैं.
कार्यशाला में उपस्थित सभी 290 शिक्षकों ने इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की और विद्यालय स्तर पर बाल वैज्ञानिकों को तैयार करने का संकल्प लिया.
