Nalanda: बिजली सुधार ठप, 8 में से केवल 2 सब-स्टेशन के लिए मिली भूमि की मंजूरी

Nalanda News: नालंदा जिले की बिजली आपूर्ति को बेहतर और आधुनिक बनाने के लिए 8 नए पावर सब-स्टेशन बनाने की योजना जमीन अधिग्रहण के मामले में अटक गई है. महीनों बाद भी 8 में से 6 जगहों पर भूमि का अधिग्रहण नहीं हो सका है, जिससे पूरा प्रोजेक्ट पास होने के बाद भी ठप नजर आ रहा है.

Nalanda News: बिहार राज्य सरकार की ओर से नालंदा जिले की बिजली आपूर्ति को आधुनिक और बेहतर बनाने के लिए 8 नए पावर सब-स्टेशन (PSS) के निर्माण की योजना को हरि झंडी मिल गई है. फिलहाल मामला जमीन अधिग्रहण की समस्या में उलझा हुआ है. महीनो पहले नालंदा जिले के छह प्रखंडों में इन पावर स्टेशन को स्वीकृति दी गई थी लेकिन आजतक केवल दो स्थानों पर ही जमीन की पहचान हो पाई है. बाकि 6 स्टेशन के लिए जमीन की तलाश अभी भी जारी है.

कई बार भेजे प्रशासन को पत्र

बिजली कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर की ओर से कई बार जिला प्रशासन को पत्र भेजकर भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है लेकिन अब तक कोई सटीक जवाब नहीं मिला है. इस देरी का असर सीधा जिले की बिजली व्यवस्था पर पड़ रहा है क्योंकि गर्मी के कारण ओवरलोडिंग और ट्रिपिंग जैसी समस्या लगातार सामने आ रही है. नालंदा सर्किल के इंजीनियर सुशिल कुमार ने बताया कि योजना को पूरा करने में भूमि अधिग्रहण की समस्या से काफी दिक्कत आ रही है. अभी तक सिर्फ डियावां (करायपरसुराय) और देकपुरा (रहुई) में जमीन तय हो सकी है. बाकी जगहों पर प्रयास किया जा रहा है.

पावर स्टेशनों की सूची

  1. प्रस्तावित पावर स्टेशनों की स्थापना इन जगहों पर होनी है
  2. बिहारशरीफ में नालंदा कॉलेज और मणिराम अखाड़ा तालाब के समीप
  3. रहुई में देकपुरा और सोसंदी
  4. नूरसराय में  रतनपुरा
  5. हिलसा में इन्दौत
  6. करायपरसुराय में डियावां 
  7. गिरियक में पावापुरी

पावर स्टेशन की तकनीकी जानकारी 

हर सब-स्टेशन की क्षमता 20 मेगावाट होगी जिसमे दो-दो 10 मेगावाट के पावर ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे. इस पूरी योजना से जिले के ऊर्जा क्षमता में 160 मेगावाट की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. तकनिकी विशेषज्ञों के अनुसार पीएसएस को दो अलग अलग सोर्स से बिजली की आपूर्ति की जाएगी. इस तकनीक से बिजली की क्वालिटी बेहतर होगी और ट्रिपिंग की समस्या में भारी कमी आएगी.

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जमीन के बिना कुछ भी संभव नहीं

फिलहाल परेशानी ये है कि जब तक जमीन नहीं मिलती तब तक निर्माण एजेंसियां काम शुरू नहीं कर सकती. आम तौर पर एक पावर सब-स्टेशन का निर्माण कार्य एक वर्ष में पूरा हो जाता है लेकिन अधिग्रहण में हो रही देरी के कारण यह पूरी परियोजना रुकी हुई है. यह काम तभी पूरा होगा जब जमीन कि समस्या का समाधान हो जाए. 

मृणाल कुमार की रिपोर्ट

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By Nishant Kumar

Nishant Kumar: निशांत कुमार पिछले तीन सालों से डिजिटल पत्रकारिता कर रहे हैं. दैनिक भास्कर के बाद राजस्थान पत्रिका के डिजिटल टीम का हिस्सा रहें. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल-इंटेरनेशनल और स्पोर्ट्स टीम में काम कर रहे हैं. किस्सागोई हैं और देश-विदेश की कहानियों पर नजर रखते हैं. साहित्य पढ़ने-लिखने में रुचि है.

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