Bihar News: बिहार सरकार ने नेपाल और बांग्लादेश सीमा से सटे सीमांचल क्षेत्र में कथित घुसपैठ और जमीन कब्जे के मामलों पर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है. खास तौर पर किशनगंज जिले में बाहरी लोगों द्वारा स्थानीय जमीनों पर कब्जा करने के आरोपों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है. विधानसभा के बजट सत्र में डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने विशेष जांच समिति गठित करने का ऐलान किया.
जदयू विधायक ने उठाया मुद्दा
ठाकुरगंज से जदयू विधायक नीरज अग्रवाल ने गैर सरकारी संकल्प के जरिए सदन में मामला उठाया. उन्होंने कहा कि किशनगंज के दिघलबैंक प्रखंड में भूदान की जमीनों पर बाहरी लोगों ने कब्जा कर लिया है. उनका दावा है कि ये जमीनें दशकों पहले दलित, आदिवासी और गरीब मुस्लिम परिवारों के नाम की गई थीं. लेकिन बीते कुछ वर्षों में इन पर दूसरे राज्यों से आए लोगों ने अधिकार जमा लिया.
मालदा और मुर्शिदाबाद का जिक्र
विधायक ने कहा कि पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद से आए लोगों ने बड़े पैमाने पर जमीन रजिस्ट्री कराई है. उनके अनुसार, दिघलबैंक प्रखंड में करीब 90 प्रतिशत ऐसी जमीनों पर कब्जा हो चुका है. उन्होंने सरकार से भौतिक सत्यापन कराने और अवैध कब्जा हटाने की मांग की. मामला उठते ही सदन में गंभीर चर्चा शुरू हो गई.
‘चिकन नेक’ की सुरक्षा का सवाल
विधायक ने यह भी कहा कि ठाकुरगंज इलाका भारत के रणनीतिक ‘चिकन नेक’ क्षेत्र में आता है. यह देश के लिए संवेदनशील भूभाग है. ऐसे में जमीन हस्तांतरण और बाहरी बसावट का मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने कागजात के आधार पर जमीनों की रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज कर जबरन कब्जा किया जा रहा है.
पहले इनकार, फिर जांच का भरोसा
जवाब में डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने शुरुआत में ऐसे मामलों से इनकार किया. उन्होंने कहा कि किशनगंज जिलाधिकारी की रिपोर्ट में मालदा और मुर्शिदाबाद के लोगों द्वारा कब्जे का कोई ठोस मामला सामने नहीं आया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर अवैध खरीद-बिक्री पाई जाती है तो जमाबंदी रद्द कर जमीन सरकार के अधीन कर दी जाती है.
हालांकि, बाद में उन्होंने सदन की चिंता को गंभीर माना. उन्होंने कहा कि यदि विधायक प्रमाण दें तो जांच होगी. इसके साथ ही विशेष समिति बनाकर पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया.
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