विद्यालय-महाविद्यालयों की जमीन का होगा सर्वे, करायी जायेगी अतिक्रमण मुक्त

राज्य के सरकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों की जमीन के संरक्षण और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए शिक्षा विभाग ने पहल की है.

-शिक्षा विभाग में भू-संपदा पदाधिकारियों की संविदा पर नियुक्ति, 32 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित

अनुराग प्रधान, पटना

राज्य के सरकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों की जमीन के संरक्षण और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए शिक्षा विभाग ने पहल की है. विभाग ने भू-संपदा पदाधिकारी और सहायक भू-संपदा पदाधिकारी के कुल 32 पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किये हैं. इन पदों पर नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य शिक्षा विभाग के अधीन संचालित विद्यालयों, महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों की जमीन का संरक्षण, सीमांकन, भूमि विवादों का समाधान और भूमि अभिलेखों का सुव्यवस्थित प्रबंधन सुनिश्चित करना है, ताकि संस्थानों की जमीन पर अतिक्रमण और विवाद की समस्याओं को प्रभावी तरीके से रोका जा सके. विभाग द्वारा जारी विज्ञापन के अनुसार भू-संपदा पदाधिकारी का एक पद और सहायक भू-संपदा पदाधिकारी के 31 पद भरे जायेंगे. चयनित पदाधिकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में पदस्थापित रहेंगे और जिला स्तर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों की भूमि का सर्वेक्षण, अभिलेखों का संधारण और विवादित मामलों के समाधान की जिम्मेदारी निभायेंगे.

तीन वर्ष के लिए होगी संविदा पर नियुक्ति

इन पदों पर नियुक्ति तीन वर्ष के लिए संविदा के आधार पर की जायेगी. अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष निर्धारित की गयी है, जबकि 31 मार्च 2026 तक आवेदक की आयु 62 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए. आवेदन केवल सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों से आमंत्रित किये गये हैं.

31 मार्च तक भेज सकते हैं आवेदन

इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित प्रपत्र के साथ आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन कॉपी 31 मार्च तक इ-मेल estateofficer.edu@gmail.com पर भेज सकते हैं. विस्तृत जानकारी शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध करायी गयी है. सहायक भू-सम्पदा पदाधिकारी के पदों का आरक्षण 31 पदों में अनुसूचित जाति के 3, अनुसूचित जनजाति के 1, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के 7, पिछड़ा वर्ग के 5, पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के 1, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 4 तथा अनारक्षित के 10 पद शामिल हैं. विभाग का मानना है कि इन नियुक्तियों से शैक्षणिक संस्थानों की जमीन से जुड़े मामलों की निगरानी, अभिलेख प्रबंधन और विवाद निबटारे की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगी.

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Author: ANURAG PRADHAN

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