निगरानी की ‘स्पेशल ड्राइव’, केस में अब गवाहों की कमी नहीं बनेगी बाधा

बिहार में भ्रष्टाचार के जिन मामलों पर दशकों से धूल जम चुकी थी, उन्हें अब एक-एक कर झाड़ा जा रहा है.

संवाददाता, पटना बिहार में भ्रष्टाचार के जिन मामलों पर दशकों से धूल जम चुकी थी, उन्हें अब एक-एक कर झाड़ा जा रहा है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने इन मामलों को निबटाने के लिए नया तरीका अपनाया है, ब्यूरो अब गवाहों की खोज के लिए ‘ स्पेशल दूत ’भेज रहा है. वह भी केवल बिहार में नहीं, राज्य की सीमाओं से बाहर भी. हाल ही में, करीब 40 साल पुराने केस में जरूरी गवाह को खोजने के लिए दो अधिकारियों को बिहार के बाहर भेजा गया. यह गवाह राज्य से बाहर रहा है. सभी पुराने केसों में गवाहों की पेशी सुनिश्चित करने के लिए डीजी स्तर से निर्देश जारी किये गये हैं. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को यह भी निर्देश मिला है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज सभी मामलों की अलग सूची तैयार कर निगरानी की जाए. केसों में निर्णय में देरी न हो, इसके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही, सरकारी गवाह के पलटने पर त्वरित सूचना और लोक अभियोजकों के भुगतान में विलंब न हो, इन सभी बिंदुओं पर विशेष निर्देश दिये गये हैं. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक ने सभी विशेष लोक अभियोजकों को अगले दो महीने में ज्यादा से ज्यादा केस निबटाने का लक्ष्य दिया है. गवाहों की पेशी के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के भी इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 के तहत दर्ज सभी मामलों की सूची तैयार कर उनकी निगरानी करने का निर्देश दिया गया है. यदि किसी केस में आरोपित को रिहा किया जाता है, तो तुरंत अपील करने और इसकी जानकारी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को देने के आदेश दिये गये हैं. सरकारी गवाह अगर अपने बयान से पलटते हैं, तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को देने को कहा गया. साथ ही, निगरानी मामलों को बराबर बांटने और लोक अभियोजकों के भुगतान में देरी न होने देने के निर्देश भी दिये जा चुके हैं. अब कोई अपराधी सिर्फ इसलिए सजा से नहीं बच पायेगा कि उसके खिलाफ गवाह उपस्थित नहीं हो सका. अभियोजन कोषांग को हर जिले में सक्रिय कर दिया गया है. इससे सजा की दर भी बढ़ रही है और केस निबटाने में भी तेजी आयी है. विनय कुमार, डीजीपी, बिहार

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By RAKESH RANJAN

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